महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 293, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ेंबाह्यकर्णो हस्तिपदस्तथा मुद्गरपिण्डकः ॥ ९ ॥ कम्बलाश्वतरौ चापि नागः कालीयकस्तथा । वृत्तसंवर्तकौ नागौ द्वौ च पद्माविति श्रुतौ ॥ १० ॥ नागः शङ्खमुखश्चैव तथा कूष्माण्डकोऽपरः । क्षेमकश्च तथा नागो नागः पिण्डारकस्तथा ॥ ११ ॥ करवीरः पुष्पदंष्ट्रो बिल्वको बिल्वपाण्डुरः । मूषकादः शङ्खशिराः पूर्णभद्रो हरिद्रकः ॥ १२ ॥ अपराजितो ज्योतिकश्च पन्नगः श्रीवहस्तथा । कौरव्यो धृतराष्ट्रश्च शङ्खपिण्डश्च वीर्यवान् ॥ १३ ॥ विरजाश्च सुबाहुश्च शालिपिण्डश्च वीर्यवान् । हस्तिपिण्डः पिठरकः सुमुखः कौणपाशनः ॥ १४ ॥ कुठरः कुञ्जरश्चैव तथा नागः प्रभाकरः । कुमुदः कुमुदाक्षश्च तित्तिरिर्हलिकस्तथा ॥ १५ ॥ कर्दमश्च महानागो नागश्च बहुमूलकः । कर्कराकर्करौ नागौ कुण्डोदरमहोदरौ ॥ १६ ॥
नागोंमें सबसे पहले शेषजी प्रकट हुए हैं। तदनन्तर वासुकि, ऐरावत, तक्षक, कर्कोटक, धनंजय, कालिय, मणिनाग, आपूरण, पिंजरक, एलापत्र, वामन, नील, अनील, कल्माष, शबल, आर्यक, उग्रक, कलशपोतक, सुमनाख्य, दधिमुख, विमलपिण्डक, आप्त, कर्कोटक (द्वितीय), शंख, वालिशिख, निष्ठानक, हेमगृह, नहुष, पिंगल, बाह्यकर्ण, हस्तिपद, मुद्गरपिण्डक, कम्बल, अश्वतर, कालीयक, वृत्त, संवर्तक, पद्म (प्रथम), पद्म (द्वितीय), शंखमुख, कूष्माण्डक, क्षेमक, पिण्डारक, करवीर, पुष्पदंष्ट्र, बिल्वक, बिल्वपाण्डुर, मूषकाद, शंखशिरा, पूर्णभद्र, हरिद्रक, अपराजित, ज्योतिक, श्रीवह, कौरव्य, धृतराष्ट्र, पराक्रमी शंखपिण्ड, विरजा, सुबाहु, वीर्यवान् शालिपिण्ड, हस्तिपिण्ड, पिठरक, सुमुख, कौणपाशन, कुठर, कुंजर, प्रभाकर, कुमुद, कुमुदाक्ष, तित्तिरि, हलिक, महानाग कर्दम, बहुमूलक, कर्कर, अकर्कर, कुण्डोदर और महोदर—ये नाग उत्पन्न हुए ॥ ५—१६ ॥
एते प्राधान्यतो नागाः कीर्तिता द्विजसत्तम । बहुत्वान्नामधेयानामितरे नानुकीर्तिताः ॥ १७ ॥
द्विजश्रेष्ठ! ये मुख्य-मुख्य नाग यहाँ बताये गये हैं। सर्पोंकी संख्या अधिक होनेसे उनके नाम भी बहुत हैं। अतः अन्य अप्रधान नागोंके नाम यहाँ नहीं कहे गये हैं ॥ १७ ॥
एतेषां प्रसवो यश्च प्रसवस्य च संततिः । असंख्येयेति मत्वा तान् न ब्रवीमि तपोधन ॥ १८ ॥
तपोधन! इन नागोंकी संतान तथा उन संतानोंकी भी संतति असंख्य हैं। ऐसा समझकर उनके नाम मैं नहीं कहता हूँ ॥ १८ ॥