भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 2234, कुल 2580 में से

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पृष्ठ 2234

'जो तेजस्वी, जितेन्द्रिय, बलवान् और अत्यन्त मानी हैं, उन्हींकी मुझ मानिनी पत्नीपर सूतपुत्रने पैरसे आघात किया है ।। २५ ।। सर्वलोकमिमं हन्युर्धर्मपाशसितास्तु ये । तेषां मां मानिनीं भार्यां सूतपुत्रः पदावधीत् ॥ २६ ॥ 'मेरे पति इस सम्पूर्ण संसारको मार सकते हैं; किंतु वे धर्मके बन्धनमें बँधे हैं, इसीसे आज उनकी मुझ मानिनी पत्नीपर सूतपुत्रने पैरसे प्रहार किया है ।। शरणं ये प्रपन्नानां भवन्ति शरणार्थिनाम् । चरन्ति लोके प्रच्छन्नाः क्व नु तेऽद्य महारथाः ॥ २७ ॥ 'जो शरण चाहनेवाले अथवा शरणमें आये हुए सब लोगोंको शरण देते हैं, वे मेरे महारथी पति अपने स्वरूपको छिपाकर आज जगत्में कहाँ विचर रहे हैं? ।। २७ ।। कथं ते सूतपुत्रेण वध्यमानां प्रियां सतीम् । मर्षयन्ति यथा क्लीबा बलवन्तोऽमितौजसः ॥ २८ ॥ 'जो अमिततेजस्वी और बलवान् हैं, वे (मेरे पति) एक सूतपुत्रद्वारा मारी जाती हुई अपनी सती-साध्वी प्रिय पत्नीका अपमान कायरों और नपुंसकोंकी भाँति कैसे सहन कर रहे हैं? ।। २८ ।। क्व नु तेषाममर्षश्च वीर्यं तेजश्च वर्तते । न परीप्सन्ति ये भार्यां वध्यमानां दुरात्मना ॥ २९ ॥ 'आज उनका अमर्ष, पराक्रम और तेज कहाँ है? जो एक दुरात्माकी मार खाती हुई अपनी पत्नीकी रक्षा नहीं करते हैं ।। २९ ।। मयात्र शक्यं किं कर्तुं विराटे धर्मदूषके । यः पश्यन् मां मर्षयति वध्यमानामनागसम् ॥ ३० ॥ 'यहाँका राजा विराट भी धर्मको कलंकित करनेवाला है; जो मुझ निरपराध अबलाको अपने सामने मार खाती देखकर भी सहन किये जाता है। भला, इसके रहते मैं इस अपमानका बदला चुकानेके लिये क्या कर सकती हूँ? ।। ३० ।। न राजा राजवत् किंचित् समाचरति कीचके । दस्युनामिव धर्मस्ते न हि संसदि शोभते ॥ ३१ ॥ नाहमेतेन युक्तं वै हन्तुं मत्स्य तवान्तिके । सभासदोऽत्र पश्यन्तु कीचकस्य व्यतिक्रमम् ॥ ३२ ॥ 'यह राजा होकर भी कीचकके प्रति कुछ भी राजोचित न्याय नहीं कर रहा है। मत्स्यराज! तुम्हारा यह लुटेरोंका-सा धर्म इस राजसभामें शोभा नहीं देता। तुम्हारे निकट इस कीचकद्वारा मुझपर मार पड़ी, यह कदापि उचित नहीं कहा जा सकता। यहाँ जो सभासद् बैठे हैं, वे भी कीचकका यह अत्याचार देखें ।। ३१-३२ ।। कीचको न च धर्मज्ञो न च मत्स्यः कथंचन ।

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