महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ
पृष्ठ 1064, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 1064
भागिनेयान् निजांस्त्यक्त्वा शल्यस्तेऽतिरथॊ मतः । एष योत्स्यति संग्रामे पाण्डवांश्च महारथान् ।। २७ ।। सागरोर्मिसमैर्बाणैः प्लावयन्निव शात्रवान् । ये अपने सगे भानजों नकुल-सहदेवको छोड़कर अन्य सभी पाण्डव महारथियोंसे समरभूमिमें युद्ध करेंगे। तुम्हारी सेनाके इन वीरशिरोमणि शल्यको मैं अतिरथी ही समझता हूँ। ये समुद्रकी लहरोंके समान अपने बाणोंद्वारा शत्रुपक्षके सैनिकोंको डुबाते हुए-से युद्ध करेंगे ।। २७ ।।