महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1068, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंयुद्धाभिकामौ समरे क्रीडन्ताविव यूथपौ । यूथमध्ये महाराज विचरन्तौ कृतान्तवत् ॥ ८ ॥ महाराज! जैसे दो यूथपति गजराज हाथियोंके झुंडमें खेल-सा करते हुए विचरते हैं, उसी प्रकार युद्धकी अभिलाषा रखनेवाले विन्द और अनुविन्द समरांगणमें यमराजके समान विचरण करते हैं ॥ ८ ॥
त्रिगर्ता भ्रातरः पञ्च रथोदारा मता मम । कृतवैराश्च पार्थैस्ते विराटनगरे तदा ॥ ९ ॥ त्रिगर्तदेशीय पाँचों भ्राताओंको मैं उदार रथी मानता हूँ। विराटनगरमें दक्षिणगोग्रहके युद्धके समय चार पाण्डवोंके साथ इनका वैर बढ़ गया था ॥ ९ ॥
मकरा इव राजेन्द्र समुद्धततरङ्गिणीम् । गङ्गां विक्षोभयिष्यन्ति पार्थानां युधि वाहिनीम् ॥ १० ॥ राजेन्द्र! जैसे ग्राहगण उत्ताल तरंगोंवाली गंगाको मथ डालते हैं, उसी प्रकार ये त्रिगर्तदेशीय पाँचों क्षत्रिय वीर पाण्डवोंकी सेनामें हलचल मचा देंगे ॥ १० ॥
ते रथाः पञ्च राजेन्द्र येषां सत्यरथो मुखम् । एते योत्स्यन्ति संग्रामे संस्मरन्तः पुराकृतम् ॥ ११ ॥ व्यलीकं पाण्डवेयेन भीमसेनानुजेन ह । दिशो विजयता राजन् श्वेतवाहेन भारत ॥ १२ ॥ महाराज! ये पाँचों भाई रथी हैं और सत्यरथ उनमें प्रधान है। भारत! भीमसेनके छोटे भाई श्वेत घोड़ोंवाले पाण्डुनन्दन अर्जुनने दिग्विजयके समय जो त्रिगर्तोंका अप्रिय किया था, उस पहलेके वैरको याद रखते हुए ये पाँचों वीर संग्रामभूमिमें मन लगाकर युद्ध करेंगे ॥ ११-१२ ॥
ते हनिष्यन्ति पार्थानां तानासाद्य महारथान् । वरान् वरान् महेष्वासान् क्षत्रियाणां धुरन्धरान् ॥ १३ ॥ ये पाण्डवोंके बड़े-बड़े महारथियोंके पास जा उन महाधनुर्धर क्षत्रियशिरोमणि वीरोंका संहार कर डालेंगे ॥
लक्ष्मणस्तव पुत्रश्च तथा दुःशासनस्य च । उभौ तौ पुरुषव्याघ्रौ संग्रामेष्वपलायिनौ ॥ १४ ॥ तुम्हारा पुत्र लक्ष्मण और दुःशासनका पुत्र—ये दोनों पुरुषसिंह युद्धसे पलायन करनेवाले नहीं हैं ॥ १४ ॥
तरुणौ सुकुमारौ च राजपुत्रौ तरस्विनौ । युद्धानां च विशेषज्ञौ प्रणेतारौ च सर्वशः ॥ १५ ॥ ये दोनों तरुण और सुकुमार राजपुत्र बड़े वेगशाली हैं, अनेक युद्धोंके विशेषज्ञ हैं और सब प्रकारसे सेनानायक होनेयोग्य हैं ॥ १५ ॥