महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2062, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवतितमोऽध्यायः
इरावान्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान्का वध
संजय उवाच
वर्तमाने तथा रौद्रे राजन् वीरवरक्षये ।
शकुनिः सौबलः श्रीमान् पाण्डवान् समुपाद्रवत् ॥ १ ॥
संजय कहते हैं— राजन्! जिस समय बड़े-बड़े वीरोंका विनाश करनेवाला वह भयंकर संग्राम चल रहा था, उसी समय सुबलपुत्र श्रीमान् शकुनिने पाण्डवोंपर आक्रमण किया ॥ १ ॥
तथैव सात्वतो राजन् हार्दिक्यः परवीरहा ।
अभ्यद्रवत संग्रामे पाण्डवानां वरूथिनीम् ॥ २ ॥
नरेश्वर! इसी प्रकार शत्रुवीरोंका विनाश करनेवाले सात्वतवंशी कृतवर्माने उस संग्राममें पाण्डवोंकी सेनापर आक्रमण किया ॥ २ ॥
ततः काम्बोजमुख्यानां नदीजानां च वाजिनाम् ।
आरट्टानां महीजानां सिन्धुजानां च सर्वशः ॥ ३ ॥
वनायुजानां शुभ्राणां तथा पर्वतवासिनाम् ।
वाजिनां बहुभिः संख्ये समन्तात् परिवारयन् ॥ ४ ॥
ये चापरे तित्तिरिजा जवना वातरंहसः ।
सुवर्णालंकृतैरेतैर्वर्मवद्भिः सुकल्पितैः ॥ ५ ॥
हयैर्वातजवैर्मुख्यैः पाण्डवस्य सुतो बली ।
अभ्यवर्तत तत् सैन्यं हृष्टरूपः परंतपः ॥ ६ ॥
तत्पश्चात् काम्बोज देशके अच्छे घोड़े, दरियाई घोड़े, मही, सिन्धु, वनायु, आरट्ट तथा पर्वतीय प्रान्तोंमें होनेवाले सुन्दर घोड़े—इन सबकी बहुत बड़ी सेनाके द्वारा सब ओरसे घिरा हुआ शत्रुओंको संताप देनेवाला पाण्डुनन्दन अर्जुनका बलवान् पुत्र इरावान् हर्षमें भरकर रणभूमिमें कौरवोंकी उस सेनापर चढ़ आया। उसके साथ तित्तिर प्रदेशके शीघ्रगामी घोड़े भी मौजूद थे, जो वायुके समान वेगशाली थे। वे सब-के-सब सोनेके आभूषणोंसे विभूषित थे। उनके शरीरोंमें कवच बँधे हुए थे और उन्हें सुन्दर साज-बाजसे सजाया गया था। वे सभी घोड़े अच्छी जातिके तथा वायुके तुल्य शीघ्रगामी थे ॥ ३—६ ॥
अर्जुनस्य सुतः श्रीमानिरावान् नाम वीर्यवान् ।
सुतायां नागराजस्य जातः पार्थेन धीमता ॥ ७ ॥