भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 2120, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 2120

थे ।। ५३ ।। नानाविधानि शस्त्राणि प्रगृह्य पतिता नराः । जीवन्त इव दृश्यन्ते गतसत्त्वा महारथाः ।। ५४ ।। भाँति-भाँतिके अस्त्र-शस्त्रोंको हाथोंमें लेकर पृथ्वीपर पड़े हुए प्राणहीन महारथी सैनिक जीवित-से दिखायी देते थे ।। ५४ ।। गदाविमथितैर्गात्रैर्मुसलैर्भिन्नमस्तकाः । गजवाजिरथक्षुण्णाः शेरते स्म नराः क्षितौ ।। ५५ ।। किन्हींके शरीर गदाकी चोटसे चूर-चूर हो गये थे, किन्हींके मस्तक मूसलोंकी मारसे फट गये थे तथा कितने ही मनुष्य घोड़े, हाथी एवं रथोंसे कुचल गये थे। ये सभी वहाँ पृथ्वीपर प्राणहीन होकर सो गये थे ।। ५५ ।। तथैवाश्वनृनागानां शरीरैर्विबभौ तदा । संछन्ना वसुधा राजन् पर्वतैरिव सर्वशः ।। ५६ ।। राजन्! इसी प्रकार घोड़े, हाथी और मनुष्योंके मृत शरीरोंसे सारी वसुधा आच्छादित हो उस समय पर्वतोंसे ढकी हुई-सी जान पड़ती थी ।। ५६ ।। समरे पतितैश्चैव शक्त्यूष्टिशरतोमरैः । निस्त्रिंशैः पट्टिशैः प्रासैरायस्कुन्तैः परश्वधैः ।। ५७ ।। परिघैर्भिन्दिपालैश्च शतघ्नीभिश्च मारिष । शरीरैः शस्त्रनिर्भिन्नैः समास्तीर्यत मेदिनी ।। ५८ ।। आर्य! समरभूमिमें गिरे हुए बाण, तोमर, शक्ति, ऋष्टि, खड्ग, पट्टिश, प्रास, लोहेके भाले, फरसे, परिघ, भिन्दिपाल तथा शतघ्नी (तोप)—इन अस्त्र-शस्त्रों तथा इनके द्वारा विदीर्ण हुए मृत शरीरोंसे सारी पृथ्वी पट गयी थी ।। ५७-५८ ।। विशब्दैरल्पशब्दैश्च शोणितौघपरिप्लुतैः । गतासुभिरमित्रघ्न विबभौ निचिता मही ।। ५९ ।। शत्रुओंका नाश करनेवाले महाराज! वहाँ पृथ्वीपर कुछ ऐसे लोग गिरे थे, जिनके मुखसे शब्द नहीं निकल पाता था। कुछ ऐसे थे, जो बहुत थोड़ा बोल पाते थे। प्रायः सभी लोग खूनसे लथपथ हो रहे थे और बहुत-से ऐसे शरीर पड़े थे, जो सर्वथा प्राणहीन हो चुके थे। इन सबके द्वारा वहाँकी भूमि मानो चुन दी गयी थी ।। ५९ ।। सतलत्रैः सकेयूरैर्बाहुभिश्चन्दनोक्षितैः । हस्तिहस्तोपमैश्छिन्नैरूरुभिश्च तरस्विनाम् ।। ६० ।। बद्धचूडामणिवरैः शिरोभिश्च सकुण्डलैः । पातितैर्ऋषभाक्षाणां बभौ भारत मेदिनी ।। ६१ ।। भारत! रणभूमिमें गिरे हुए बैलके समान विशाल नेत्रोंवाले वेगशाली वीरोंकी दस्तानों और केयूरोंसे युक्त चन्दनचर्चित भुजाओंसे, हाथीकी सूँड़के समान प्रतीत होनेवाली छिन्न-

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