भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 2173, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 2173

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चतुरधिकशततमोऽध्यायः

अर्जुनके द्वारा त्रिगतोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध

संजय उवाच

अर्जुनस्तान् नरव्याघ्रः सुशर्मानुचरान् नृपान् । अनयत् प्रेतराजस्य सदनं सायकैः शितैः ॥ १ ॥ संजय कहते हैं— राजन्! पुरुषसिंह अर्जुन अपने तीखे बाणोंसे सुशर्माके अनुगामी नरेशोंको यमलोक भेजने लगे ॥ १ ॥

सुशर्मापि ततो बाणैः पार्थं विव्याध संयुगे । वासुदेवं च सप्तत्या पार्थं च नवभिः पुनः ॥ २ ॥ तब सुशर्माने भी युद्धस्थलमें अनेक बाणोंद्वारा कुन्तीकुमार अर्जुनको घायल कर दिया। फिर उसने वसुदेवनन्दन श्रीकृष्णको सत्तर और अर्जुनको नौ बाण मारे ॥

तं निवार्य शरौघेण शक्रसूनुर्महारथः । सुशर्मणो रणे योध्दान् प्राहिणोद् यमसादनम् ॥ ३ ॥ यह देख इन्द्रपुत्र महारथी अर्जुनने अपने बाण-समूहोंके द्वारा सुशर्माको रोककर रणक्षेत्रमें उसके योद्धाओंको यमलोक पहुँचाना आरम्भ किया ॥ ३ ॥

ते वध्यमानाः पार्थेन कालेनेव युगक्षये । व्यद्रवन्त रणे राजन् भये जाते महारथाः ॥ ४ ॥ राजन्! जैसे युगान्तमें साक्षात् कालके द्वारा सारी प्रजा मारी जाती है, उसी प्रकार रणक्षेत्रमें अर्जुनके द्वारा मारे जाते हुए सारे महारथी युद्धका मैदान छोड़कर भागने लगे ॥ ४ ॥

उत्सृज्य तुरगान् केचिद् रथान् केचिच्च मारिष । गजानन्ये समुत्सृज्य प्राद्रवन्त दिशो दश ॥ ५ ॥ आर्य! कुछ लोग घोड़ोंको, कुछ दूसरे लोग रथोंको और इसी प्रकार कुछ लोग हाथियोंको छोड़कर दसों दिशाओंमें भागने लगे ॥ ५ ॥

अपरे तु तदाऽऽदाय वाजिनागरथान् रणे । त्वरया परया युक्ताः प्राद्रवन्त विशाम्पते ॥ ६ ॥ पादाताश्चापि शस्त्राणि समुत्सृज्य महारणे ।

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