महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2271, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंभरतनन्दन! उन दोनोंका वह भयंकर युद्ध विचित्र एवं सम्पूर्ण इन्द्रियोंको प्रसन्न करनेवाला था। समस्त भूपाल उस युद्धकी प्रशंसा करते थे ॥ ७ ॥ भीष्मस्य निधनार्थाय पार्थस्य विजयाय च । युयुधाते रणे वीरौ सौभद्रकुरुपुङ्गवौ ॥ ८ ॥ भीष्मके वध और अर्जुनकी विजयके लिये उस युद्धके मैदानमें सुभद्रकुमार अभिमन्यु और कुरुश्रेष्ठ दुर्योधन—ये दोनों वीर युद्ध कर रहे थे ॥ ८ ॥ सात्यकिं रभसं युद्धे द्रौणिर्ब्राह्मणपुङ्गवः । आजघानोरसि क्रुद्धो नाराचेन परंतपः ॥ ९ ॥ दूसरी ओर शत्रुओंको संताप देनेवाले ब्राह्मण-शिरोमणि द्रोणपुत्र अश्वत्थामाने कुपित हो युद्धमें अत्यन्त वेगशाली सात्यकिको लक्ष्य करके उनकी छातीमें एक नाराचसे प्रहार किया ॥ ९ ॥ शैनेयोऽपि गुरोः पुत्रं सर्वमर्मसु भारत । अताडयदमेयात्मा नवभिः कङ्कवाजितैः ॥ १० ॥ भारत! तब अनन्त आत्मबलसे सम्पन्न सात्यकिने भी गुरुपुत्र अश्वत्थामाके सम्पूर्ण मर्मस्थानोंमें नौ कंकपत्रयुक्त बाण मारे ॥ १० ॥ अश्वत्थामा तु समरे सात्यकिं नवभिः शरैः । त्रिंशता च पुनस्तूर्णं बाह्वोरुरसि चार्पयत् ॥ ११ ॥ अश्वत्थामाने समरभूमिमें सात्यकिको पहले नौ बाणोंसे घायल करके फिर तुरंत ही तीस बाणोंद्वारा उनकी भुजाओं तथा छातीमें गहरी चोट पहुँचायी ॥ ११ ॥ सोऽतिविद्धो महेष्वासो द्रोणपुत्रेण सात्वतः । द्रोणपुत्रं त्रिभिर्बाणैराजघान महायशाः ॥ १२ ॥ द्रोणपुत्र अश्वत्थामाके द्वारा अत्यन्त घायल होकर महायशस्वी महाधनुर्धर सात्यकिने तीन बाणोंसे उसे भी घायल कर दिया ॥ १२ ॥ पौरवो धृष्टकेतुं च शरैराच्छाद्य संयुगे । बहुधा दारयांचक्रे महेष्वासं महारथः ॥ १३ ॥ महारथी पौरवने युद्धमें महाधनुर्धर धृष्टकेतुको बाणोंद्वारा आच्छादित करके उन्हें बारंबार घायल किया ॥ तथैव पौरवं युद्धे धृष्टकेतुर्महारथः । त्रिंशता निशितैर्बाणैर्विव्याधाशु महाभुजः ॥ १४ ॥ उसी प्रकार महारथी महाबाहु धृष्टकेतुने युद्धस्थलमें तीस पैने बाणोंद्वारा पौरवको भी तुरंत ही घायल कर दिया ॥ १४ ॥ पौरवस्तु धनुश्छित्त्वा धृष्टकेतोर्महारथः । ननाद बलवन्नादं विव्याध च शितैः शरैः ॥ १५ ॥