महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 649, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंयदर्थं क्षत्रिया सूते तस्य कालोऽयमागतः ।। ७५ ।।
‘श्रीकृष्ण! तुम अर्जुन तथा युद्धके लिये सदा उद्यत रहनेवाले भीमसेनसे कहना कि क्षत्राणी जिस प्रयोजनके लिये पुत्र उत्पन्न करती है, उसे पूरा करनेका यह समय आ गया है ।। ७५ ।।
अस्मिंश्चेदागते काले मिथ्या चातिक्रमिष्यति ।
लोकसम्भाविताः सन्तः सुनृशंसं करिष्यथ ।। ७६ ।।
नृशंसेन च वो युक्तांस्त्यजेयं शाश्वतीः समाः ।
काले हि समनुप्राप्ते त्यक्तव्यमपि जीवनम् ।। ७७ ।।
‘यदि ऐसा समय आनेपर भी तुम युद्ध नहीं करोगे तो यह व्यर्थ बीत जायगा। तुमलोग इस जगत्के सम्मानित पुरुष हो। यदि तुम कोई अत्यन्त घृणित कर्म कर डालोगे तो उस नृशंस कर्मसे युक्त होनेके कारण मैं तुम्हें सदाके लिये त्याग दूँगी। पुत्रो! तुम्हें तो समय आनेपर अपने प्राणोंको भी त्याग देनेके लिये उद्यत रहना चाहिये ।। ७६-७७ ।।
माद्रीपुत्रौ च वक्तव्यौ क्षत्रधर्मरतौ सदा ।
विक्रमेणार्जितान् भोगान् वृणीतं जीवितादपि ।। ७८ ।।
‘गोविन्द! तुम सदा क्षत्रियधर्ममें तत्पर रहनेवाले माद्रीनन्दन नकुल-सहदेवसे भी कहना—‘पुत्रो! तुम प्राणोंकी बाजी लगाकर भी पराक्रमसे प्राप्त किये हुए भोगोंको ही ग्रहण करना ।। ७८ ।।
विक्रमाधिगता ह्यर्थाः क्षत्रधर्मेण जीवतः ।
मनो मनुष्यस्य सदा प्रीणन्ति पुरुषोत्तम ।। ७९ ।।
‘पुरुषोत्तम! क्षत्रियधर्मसे जीवननिर्वाह करनेवाले मनुष्यके मनको पराक्रमसे प्राप्त हुआ धन ही सदा संतुष्ट रखता है ।। ७९ ।।
गत्वा ब्रूहि महाबाहो सर्वशस्त्रभृतां वरम् ।
अर्जुनं पाण्डवं वीरं द्रौपद्याः पदवीं चर ।। ८० ।।
‘महाबाहो! तुम पाण्डवोंके पास जाकर सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ पाण्डुनन्दन वीर अर्जुनसे कहना कि तुम द्रौपदीके बताये हुए मार्गपर चलो ।। ८० ।।
विदितौ हि तवात्यन्तं क्रुद्धौ तौ तु यथान्तकौ ।
भीमार्जुनौ नयेतां हि देवानपि परां गतिम् ।। ८१ ।।
‘श्रीकृष्ण! तुम तो जानते ही हो; यदि भीमसेन और अर्जुन अत्यन्त कुपित हो जायँ तो वे यमराजके समान होकर देवताओंको भी मृत्युके मुखमें पहुँचा सकते हैं ।। ८१ ।।
तयोश्चैतदवज्ञानं यत् सा कृष्णा सभां गता ।
दुःशासनश्च कर्णश्च परुषाण्यभ्यभाषताम् ।। ८२ ।।
दुर्योधनो भीमसेनमभ्यगच्छन्मनस्विनम् ।
पश्यतां कुरुमुख्यानां तस्य द्रक्ष्यति यत् फलम् ।। ८३ ।।