महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 687, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंतस्य ते पृथिवीपालास्त्वत्समाः पृथिवीपते । श्रेयांसश्चैव राजानः संधास्यन्ते परंतप ॥ २३ ॥ शत्रुओंको संताप देनेवाले भूपाल! उस दशामें जो राजा आपके समान या आपसे बड़े हैं, वे भी आपके साथ संधि कर लेंगे ॥ २३ ॥
स त्वं पुत्रैश्च पौत्रैश्च पितृभिर्भ्रातृभिस्तथा । सुहृद्भिः सर्वतो गुप्तः सुखं शक्ष्यसि जीवितुम् ॥ २४ ॥ इस प्रकार आप अपने पुत्र, पौत्र, पिता, भाई और सुहृदोंद्वारा सर्वथा सुरक्षित रहकर सुखसे जीवन बिता सकेंगे ॥ २४ ॥
एतानेव पुरोधाय सत्कृत्य च यथा पुरा । अखिलां भोक्ष्यसे सर्वां पृथिवीं पृथिवीपते ॥ २५ ॥ पृथिवीपते! यदि आप पहलेकी भाँति इन पाण्डवोंका ही सत्कार करके इन्हें आगे रखें तो इस सारी पृथिवीका उपभोग करेंगे ॥ २५ ॥
एतैर्हि सहितः सर्वैः पाण्डवैः स्वैश्च भारत । अन्यान् विजेष्यसे शत्रूनेष स्वार्थस्तवाखिलः ॥ २६ ॥ भारत! इन समस्त पाण्डवों तथा अपने पुत्रोंके साथ रहकर आप दूसरे शत्रुओंपर भी विजय प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रकार आपके सम्पूर्ण स्वार्थकी सिद्धि होगी ॥ २६ ॥
तैरेवोपार्जितां भूमिं भोक्ष्यसे च परंतप । यदि सम्पत्स्यसे पुत्रैः सहामात्यैर्नराधिप ॥ २७ ॥ शत्रुसंतापी नरेश! यदि आप मन्त्रियोंसहित अपने समस्त पुत्रों (पाण्डवों और कौरवों)-से मिलकर रहेंगे तो उन्हींके द्वारा जीती हुई इस पृथिवीका राज्य भोगेंगे ॥ २७ ॥
संयुगे वै महाराज दृश्यते सुमहान् क्षयः । क्षये चोभयतो राजन् कं धर्ममनुपश्यसि ॥ २८ ॥ महाराज! युद्ध छिड़नेपर तो महान् संहार ही दिखायी देता है। राजन्! इस प्रकार दोनों पक्षका विनाश करानेमें आप कौन-सा धर्म देखते हैं? ॥ २८ ॥
पाण्डवैर्निहतैः संख्ये पुत्रैर्वापि महाबलैः यद् विन्देथाः सुखं राजंस्तद् ब्रूहि भरतर्षभ ॥ २९ ॥ भरतश्रेष्ठ! यदि पाण्डव युद्धमें मारे गये अथवा आपके महाबली पुत्र ही नष्ट हो गये तो उस दशामें आपको कौन-सा सुख मिलेगा? यह बताइये ॥ २९ ॥
शूराश्च हि कृतास्त्राश्च सर्वे युद्धाभिकाङ्क्षिणः । पाण्डवास्तावकाश्चैव तान् रक्ष महतो भयात् ॥ ३० ॥ पाण्डव तथा आपके पुत्र सभी शूरवीर, अस्त्रविद्याके पारंगत तथा युद्धकी अभिलाषा रखनेवाले हैं। आप इन सबकी महान् भयसे रक्षा कीजिये ॥ ३० ॥
न पश्येम कुरून् सर्वान् पाण्डवांश्चैव संयुगे ।