भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 1356

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एकाशीत्यधिकशततमोऽध्यायः

भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना

अर्जुन उवाच

कथमस्मद्धितार्थं ते कैश्च योगैर्जनार्दन ।
जरासंधप्रभृतयो घातिताः पृथिवीश्वराः ॥ १ ॥

**अर्जुनने पूछा—**जनार्दन! आपने हमलोगोंके हितके लिये कैसे किन-किन उपायोंसे जरासंध आदि राजाओंका वध कराया है? ॥ १ ॥

श्रीवासुदेव उवाच

जरासंधश्चेदिराजो नैषादिश्च महाबलः ।
यदि स्युर्न हताः पूर्वमिदानीं स्युर्भयंकराः ॥ २ ॥

**भगवान् श्रीकृष्णने कहा—**अर्जुन! जरासंध, शिशुपाल और महाबली एकलव्य यदि ये पहले ही मारे न गये होते तो इस समय बड़े भयंकर सिद्ध होते ॥ २ ॥

दुर्योधनस्तानवश्यं वृणुयाद् रथसत्तमान् ।
तेऽस्मासु नित्यविद्विष्टाः संश्रयेयुश्च कौरवान् ॥ ३ ॥

दुर्योधन उन श्रेष्ठ रथियोंसे अपनी सहायताके लिये अवश्य प्रार्थना करता और वे हमसे सर्वदा द्वेष रखनेके कारण निश्चय ही कौरवोंका पक्ष लेते ॥ ३ ॥

ते हि वीरा महेष्वासाः कृतास्त्रा दृढयोधिनः ।
धार्तराष्ट्रां चमूं कृत्स्नां रक्षेयुरमरा इव ॥ ४ ॥

वे वीर महाधनुर्धर, अस्त्रविद्याके ज्ञाता तथा दृढ़तापूर्वक युद्ध करनेवाले थे; अतः दुर्योधनकी सारी सेनाकी देवताओंके समान रक्षा कर सकते थे ॥ ४ ॥

सूतपुत्रो जरासंधश्चेदिराजो निषादजः ।
सुयोधनं समाश्रित्य जयेयुः पृथिवीमिमाम् ॥ ५ ॥

सूतपुत्र कर्ण, जरासंध, चेदिराज शिशुपाल और निषादनन्दन एकलव्य—ये चारों मिलकर यदि दुर्योधनका पक्ष लेते तो इस पृथ्वीको अवश्य ही जीत लेते ॥ ५ ॥

योगैरपि हता यैस्ते तन्मे शृणु धनंजय ।
अजय्या हि विना योगैर्मृधे ते दैवतैरपि ॥ ६ ॥

धनंजय! वे जिन उपायोंसे मारे गये हैं, उन्हें बतलाता हूँ, मुझसे सुनो। बिना उपाय किये तो उन्हें युद्धमें देवता भी नहीं जीत सकते थे ॥ ६ ॥

एकैको हि पृथक् तेषां समस्तां सुरवाहिनीम् ।