महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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ब्रह्मलोकं गतो राजन् ब्राह्मणो वेदपारगः ॥ १०० ॥
राजन्! इस प्रकार वेदोंके पारंगत विद्वान् द्रोणाचार्य पाँच दिनोंतक युद्ध तथा शत्रुसेनाका संहार करके ब्रह्मलोकको चले गये ॥ १०० ॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि नारायणास्त्रमोक्षपर्वणि व्यासवाक्ये शतरुद्रिये एकाधिकद्विशततमोऽध्यायः ॥ २०१ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत नारायणास्त्रमोक्षपर्वमें व्यासवाक्य तथा शतरुद्रिय स्तुतिविषयक दो सौ एकवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २०१ ॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/३ श्लोक मिलाकर कुल १०२ १/३ श्लोक हैं।)