महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1924, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंषट्चत्वारिंशोऽध्यायः
कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा
संजय उवाच
ततः परानीकसहं व्यूहमप्रतिमं कृतम् ।
समीक्ष्य कर्णः पार्थानां धृष्टद्युम्नाभिरक्षितम् ॥ १ ॥
प्रययौ रथघोषेण सिंहनादरवेण च ।
वादित्राणां च निनदैः कम्पयन्निव मेदिनीम् ॥ २ ॥
वेपमान इव क्रोधाद् युद्धशौण्डः परंतपः ।
प्रतिव्यूह्य महातेजा यथावद् भरतर्षभ ॥ ३ ॥
व्यधमत् पाण्डवीं सेनामासुरीं मघवानिव ।
युधिष्ठिरं चाभ्यहनदपसव्यं चकार ह ॥ ४ ॥
**संजय कहते हैं—**भरतश्रेष्ठ! तदनन्तर यह देखकर कि कुन्तीकुमारोंकी सेनाका अनुपम व्यूह बनाया गया है, जो शत्रुदलके आक्रमणको सह सकनेमें समर्थ और धृष्टद्युम्नद्वारा सुरक्षित है, शत्रुओंको संताप देनेवाला युद्धकुशल कर्ण रथकी घर्घराहट, सिंहकी-सी गर्जना तथा वाद्योंकी गम्भीर ध्वनिसे पृथ्वीको कँपाता और स्वयं भी क्रोधसे काँपता हुआ-सा आगे बढ़ा। उस महातेजस्वी वीरने शत्रुओंके मुकाबलेमें अपनी सेनाकी यथोचित व्यूह-रचना करके, जैसे इन्द्र आसुरी सेनाका संहार करते हैं, उसी प्रकार पाण्डव-सेनाका विनाश आरम्भ कर दिया और युधिष्ठिरको भी घायल करके दाहिने कर दिया ॥ १—४ ॥
(तानि सर्वाणि सैन्यानि कर्णं दृष्ट्वा विशाम्पते ।
बभूवुः सम्प्रहृष्टानि तावकानि युयुत्सया ॥
अश्रूयन्त ततो वाचस्तावकानां विशाम्पते ।
प्रजानाथ! (उस समय) आपके सभी सैनिक कर्णको देखकर युद्धकी इच्छासे हर्ष और उत्साहमें भर गये। राजन्! उस समय आपके योद्धाओंकी कही हुई ये बातें सुनायी देने लगीं।
सैनिका ऊचुः
कर्णार्जुनमहायुद्धमेतदद्य भविष्यति ।
अद्य दुर्योधनो राजा हतामित्रो भविष्यति ॥