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भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2290, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 2290

नवजलदसवर्णैर्हस्तिभिस्तानुदीयु- र्गिरिशिखरनिकाशैर्भीमवेगैः कुलिन्दाः ॥ ४ ॥ नरश्रेष्ठ नरेश्वर! कृपाचार्य आदि आपके रथी वीरोंने अपने उत्तम बाणोंद्वारा प्रहार करते हुए वहाँ पाण्डव-पक्षके उन ग्यारह महारथी वीरोंको आगे बढ़नेसे रोक दिया। तत्पश्चात् कुलिन्ददेशके योद्धा नूतन मेघके समान काले, पर्वतशिखरोंके समान विशालकाय और भयंकर वेगशाली हाथियोंद्वारा कौरववीरोंपर चढ़ आये ॥

सुकल्पिता हैमवता मदोत्कटा रणाभिकामैः कृतिभिः समास्थिताः । सुवर्णजालैर्वितता बभुर्गजा- स्तथा यथा खे जलदाः सविद्युतः ॥ ५ ॥ वे हिमाचलप्रदेशके मदोन्मत्त हाथी अच्छी तरह सजाये गये थे। उनकी पीठोंपर सोनेकी जालियोंसे युक्त झूल पड़े हुए थे और उनके ऊपर युद्धकी अभिलाषा रखनेवाले, रणकुशल कुलिन्द वीर बैठे हुए थे। उस समय रणभूमिमें वे हाथी आकाशमें बिजलीसहित मेघोंके समान शोभा पा रहे थे ॥ ५ ॥

कुलिन्दपुत्रो दशभिर्महायसैः कृपं ससूताश्वमपीडयद् भृशम् । ततः शरद्वत्सुतसायकैर्हतः सहैव नागेन पपात भूतले ॥ ६ ॥ कुलिन्दराजके पुत्रने लोहेके बने हुए दस विशाल बाणोंसे सारथि और घोड़ोंसहित कृपाचार्यको अत्यन्त पीड़ित कर दिया। तदनन्तर शरद्वान्के पुत्र कृपाचार्यके बाणोंद्वारा मारा जाकर वह हाथीके साथ ही पृथ्वीपर गिर पड़ा ॥ ६ ॥

कुलिन्दपुत्रावरजस्तु तोमरै- र्दिवाकरांशुप्रतिमैरयस्मयैः । रथं च विक्षोभ्य ननाद नर्दत- स्ततोऽस्य गान्धारपतिः शिरोऽहरत् ॥ ७ ॥ कुलिन्दराजकुमारका छोटा भाई सूर्यकी किरणोंके समान कान्तिमान् एवं लोहेके बने हुए तोमरोंद्वारा गान्धारराजके रथकी धज्जियाँ उड़ाकर जोर-जोरसे गर्जना करने लगा। इतनेहीमें गान्धारराजने उस गर्जते हुए वीरका सिर काट लिया ॥ ७ ॥

ततः कुलिन्देषु हतेषु तेष्वथ प्रहृष्टरूपास्तव ते महारथाः । भृशं प्रदध्मुर्लवणाम्बुसम्भवान् परांश्च बाणासनपाणयोऽभ्ययुः ॥ ८ ॥