भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 2864

स तानाह न मे धर्मो नश्येदिति पुनर्मुनीन् । यो ह्यधर्मेण वै ब्रूयाद् गृह्णीयाद् योऽप्यधर्मतः ॥ ४८ ॥ हीयेतां तावुभौ क्षिप्रं स्यातां वा वैरिणावुभौ । तब वहाँ उन मुनियोंने कहा—'बेटा! तुम तो अभी बालक हो' (हम तुम्हारे शिष्य कैसे हो सकते हैं?) तब सारस्वतने पुनः उन मुनियोंसे कहा—'मेरा धर्म नष्ट न हो, इसलिये मैं आपलोगोंको शिष्य बनाना चाहता हूँ; क्योंकि जो अधर्मपूर्वक वेदोंका प्रवचन करता है तथा जो अधर्मपूर्वक उन वेदमन्त्रोंको ग्रहण करता है, वे दोनों शीघ्र ही हीनावस्थाको प्राप्त होते हैं अथवा दोनों एक-दूसरेके वैरी हो जाते हैं ।। ४७-४८१/२ ।। न हायनैर्न पलितैर्न वित्तेन न बन्धुभिः ॥ ४९ ॥ ऋषयश्चक्रिरे धर्मं योऽनूचानः स नो महान् । 'न बहुत वर्षोंकी अवस्था होनेसे, न बाल पकनेसे, न धनसे और न अधिक भाई-बन्धुओंसे कोई बड़ा होता है। ऋषियोंने हमारे लिये यही धर्म निश्चित किया है कि हममेंसे जो वेदोंका प्रवचन कर सके, वही महान् है' ।। एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य मुनयस्ते विधानतः ॥ ५० ॥ तस्माद् वेदाननुप्राप्य पुनर्धर्मं प्रचक्रिरे । सारस्वतकी यह बात सुनकर वे मुनि उनसे विधिपूर्वक वेदोंका उपदेश पाकर पुनः धर्मका अनुष्ठान करने लगे ।। ५०१/२ ।। षष्टिर्मुनिसहस्राणि शिष्यत्वं प्रतिपेदिरे ॥ ५१ ॥ सारस्वतस्य विप्रर्षेर्वेदस्वाध्यायकारणात् । साठ हजार मुनियोंने स्वाध्यायके निमित्त ब्रह्मर्षि सारस्वतकी शिष्यता ग्रहण की थी ।। ५११/२ ।। मुष्टिं मुष्टिं ततः सर्वे दर्भाणां ते ह्युपाहरन् । तस्यासनार्थं विप्रर्षेर्बालस्यापि वशे स्थिताः ॥ ५२ ॥ वे ब्रह्मर्षि यद्यपि बालक थे तो भी वे सभी बड़े-बड़े महर्षि उनकी आज्ञाके अधीन रहकर उनके आसनके लिये एक-एक मुट्ठी कुश ले आया करते थे ।। तत्रापि दत्त्वा वसु रौहिणेयो महाबलः केशवपूर्वजोऽथ । जगाम तीर्थं मुदितः क्रमेण ख्यातं महद् वृद्धकन्या स्म यत्र ॥ ५३ ॥ श्रीकृष्णके बड़े भाई महाबली रोहिणीनन्दन बलरामजी वहाँ भी स्नान और धन दान करके प्रसन्नतापूर्वक क्रमशः सब तीर्थोंमें विचरते हुए उस विख्यात महातीर्थमें गये, जहाँ कभी वृद्धा कुमारी कन्या निवास करती थी ।। ५३ ।।