महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1689, कुल 2450 में से
संदर्भ में पढ़ेंपदचिह्नकी खोज करनेवाले देवता भी उस ज्ञानी पुरुषके मार्गके विषयमें मोहित हो जाते हैं—उसकी गतिका पता नहीं पाते हैं ॥ ३२ ॥ दानं भूताभयस्याहुः सर्वदानेभ्य उत्तमम् । ब्रवीमि ते सत्यमिदं श्रद्धध्व च जाजले ॥ ३३ ॥ प्राणियोंको अभयदान देना सब दानोंसे उत्तम बताया गया है। जाजले! मैं तुमसे यह सच्ची बात कहता हूँ, तुम इसपर विश्वास करो ॥ ३३ ॥ स एव सुभगो भूत्वा पुनर्भवति दुर्भगः । व्यापत्तिं कर्मणां दृष्ट्वा जुगुप्सन्ति जनाः सदा ॥ ३४ ॥ जो स्वर्गादिकी कामना करके धर्मकार्य करते हैं, वे ही स्वर्गादि फलोंको पाकर सौभाग्यवान् कहलाते हैं, फिर वे ही पुण्यक्षीण होनेके पश्चात् जब स्वर्गसे नीचे गिरते हैं, तब दुर्भाग्यसे दूषित माने जाते हैं, इस प्रकार कर्मोंका विनाश देखकर विज्ञ पुरुष सदा ही सकाम कर्मोंकी निन्दा करते हैं ॥ ३४ ॥ अकारणो हि नैवास्ति धर्मः सूक्ष्मो हि जाजले । भूतभव्यार्थमेवेह धर्मप्रवचनं कृतम् ॥ ३५ ॥ जाजले! कोई भी धर्म निष्प्रयोजन या निष्फल नहीं है, उसका स्वरूप अत्यन्त सूक्ष्म है, स्वर्ग या ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये ही यहाँ धर्मकी व्याख्या की गयी है ॥ सूक्ष्मत्वान्न स विज्ञातुं शक्यते बहुनिह्नवः । उपलभ्यान्तरा चान्यानाचारानवबुध्यते ॥ ३६ ॥ धर्मका स्वरूप अत्यन्त सूक्ष्म होनेके कारण वह सबकी समझमें नहीं आ सकता; क्योंकि उसके स्वरूपको छिपानेवाली बहुत-सी बातें हैं। बीच-बीचमें विभिन्न सत्पुरुषोंके आचारोंको देखकर मनुष्य वास्तविक धर्मका ज्ञान प्राप्त करता है ॥ ३६ ॥ ये च छिन्दन्ति वृषणान् ये च भिन्दन्ति नस्तकान् । वहन्ति महतो भारान् बध्नन्ति दमयन्ति च ॥ ३७ ॥ हत्वा सत्त्वानि खादन्ति तान् कथं न विगर्हसे । मानुषा मानुषानेव दासभावेन भुञ्जते ॥ ३८ ॥ जो लोग बैलोंको बधिया करके बाँधते-नाथते, उनसे भारी बोझ धुलाते और उनका दमन करके उन्हें कामपर निकालते हैं, जो कितने ही जीवोंको मारकर खा जाते हैं, मनुष्य होकर मनुष्योंको दास बनाकर और उनके परिश्रमका फल आप भोगते हैं, उनकी तुम निन्दा क्यों नहीं करते हो? ॥ ३७-३८ ॥ वधबन्धनिरोधेन कारयन्ति दिवानिशम् । आत्मनश्चापि जानाति यद् दुःखं वधबन्धने ॥ ३९ ॥ जो लोग वध और बन्धनकी दशामें अपनेको कितना कष्ट होता है, इस बातको जानते हैं तो भी दूसरोंको वध, बन्धन और कैदके कष्टमें डालकर उनसे दिन-रात काम कराते हैं,