महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 731
* देखिये कर्णपर्व अध्याय ६९ श्लोक ३८ से ४५ तक।
१. गंगाके तटपर किसी सर्पिणीने सहस्रों अण्डे देकर रख दिये थे। उन अण्डोंको एक उल्लूने रातमें फोड़-फोड़कर नष्ट कर दिया। इससे वह महान् पुण्यका भागी हुआ; अन्यथा उन अण्डोंसे हजारों विषैले सर्प पैदा होकर कितने ही लोगोंका विनाश कर डालते।