भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1141, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1141

सधातुशिखराभोगो दीप्तदग्धलतौषधिः ॥ ३५ ॥
उसने क्षणभरमें हिमालय पर्वतको धातु और विशाल शिखरोंसहित दग्ध कर डाला। उसकी लताएँ और ओषधियाँ प्रज्वलित हो जलकर भस्म हो गयीं ॥
तं दृष्ट्वा मथितं शैलं शैलराजसुता ततः ।
भगवन्तं प्रपन्ना वै साञ्जलिप्रग्रहा स्थिता ॥ ३६ ॥
उस पर्वतको दग्ध हुआ देख गिरिराजकुमारी उमा दोनों हाथ जोड़कर भगवान् शंकरकी शरणमें गयीं ॥ ३६ ॥
उमां शर्वस्तदा दृष्ट्वा स्त्रीभावगतमार्दवाम् ।
पितुर्दैन्यमनिच्छन्तीं प्रीत्यापश्यत् तदा गिरिम् ॥ ३७ ॥
उस समय उमामें नारी-स्वभाववश मृदुता (कातरता) आ गयी थी। वे पिताकी दयनीय अवस्था नहीं देखना चाहती थीं। उनकी ऐसी दशा देख भगवान् शंकरने हिमवान् पर्वतकी ओर प्रसन्नतापूर्ण दृष्टिसे देखा ॥ ३७ ॥
क्षणेन हिमवान् सर्वः प्रकृतिस्थः सुदर्शनः ।
प्रहृष्टविहगश्चैव सुपुष्पितवनद्रुमः ॥ ३८ ॥
उनकी दृष्टि पड़नेपर क्षणभरमें सारा हिमालय पर्वत पहली स्थितिमें आ गया। देखनेमें परम सुन्दर हो गया। वहाँ हर्षमें भरे हुए पक्षी कलरव करने लगे। उस वनके वृक्ष सुन्दर पुष्पोंसे सुशोभित हो गये ॥ ३८ ॥
प्रकृतिस्थं गिरिं दृष्ट्वा प्रीता देवं महेश्वरम् ।
उवाच सर्वलोकानां पतिं शिवमनिन्दिता ॥ ३९ ॥
पर्वतको पूर्वावस्थामें स्थित हुआ देख पतिव्रता पार्वती देवी बहुत प्रसन्न हुईं। फिर उन्होंने सम्पूर्ण लोकोंके स्वामी कल्याणस्वरूप महेश्वरदेवसे पूछा ॥ ३९ ॥

उमोवाच

भगवन् सर्वभूतेश शूलपाणे महाव्रत ।
संशयो मे महान् जातस्तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ॥ ४० ॥
उमा बोलीं— भगवन्! सर्वभूतेश्वर! शूलपाणे! महान् व्रतधारी महेश्वर! मेरे मनमें एक महान् संशय उत्पन्न हुआ है। आप मुझसे उसकी व्याख्या कीजिये ॥
किमर्थं ते ललाटे वै तृतीयं नेत्रमुत्थितम् ।
किमर्थं च गिरिर्दग्धः सपक्षिगणकाननः ॥ ४१ ॥
किमर्थं च पुनर्देव प्रकृतिस्थस्त्वया कृतः ।
तथैव द्रुमसंच्छन्नः कृतोऽयं ते पिता मम ॥ ४२ ॥
क्यों आपके ललाटमें तीसरा नेत्र प्रकट हुआ? किसलिये आपने पक्षियों और वनोंसहित पर्वतको दग्ध किया और देव! फिर किसलिये आपने उसे पूर्वावस्थामें ला दिया।