भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1891, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1891

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एकषष्टितमोऽध्यायः

श्रीकृष्णका सुभद्राके कहनेसे वसुदेवजीको अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनाना

वैशम्पायन उवाच

कथयन्नेव तु तदा वासुदेवः प्रतापवान् ।
महाभारतयुद्धं तत्कथान्ते पितुरग्रतः ॥ १ ॥
अभिमन्योर्वधं वीरः सोऽत्यक्रामन्महामतिः ।
अप्रियं वसुदेवस्य मा भूदिति महामतिः ॥ २ ॥
मा दौहित्रवधं श्रुत्वा वसुदेवो महात्ययम् ।
दुःखशोकाभिसंतप्तो भवेदिति महामतिः ॥ ३ ॥

**वैशम्पायनजी कहते हैं—**जनमेजय! प्रतापी वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण जब पिताके सामने महाभारतयुद्धका वृत्तान्त सुना रहे थे, उस समय उन्होंने उस कथाके बीचमें जान-बूझकर अभिमन्युवधका वृत्तान्त छोड़ दिया। परम बुद्धिमान् वीर श्रीकृष्णने सोचा, पिताजी अपने नातीकी मृत्युका महान् अमंगलजनक समाचार सुनकर कहीं दुःख-शोकसे संतप्त न हो उठें। इनका अप्रिय न हो जाय। इसीसे वह प्रसंग नहीं सुनाया ।। १—३ ।।

सुभद्रा तु तमुत्क्रान्तमात्मजस्य वधं रणे ।
आचक्ष्व कृष्ण सौभद्रवधमित्यपतद् भुवि ॥ ४ ॥

परन्तु सुभद्राने जब देखा कि मेरे पुत्रके निधनका समाचार इन्होंने नहीं सुनाया, तब उसने याद दिलाते हुए कहा—'भैया! मेरे अभिमन्युके वधकी बात भी तो बता दो।' इतना कहकर वह मूर्च्छित होकर पृथ्वीपर गिर पड़ी ।। ४ ।।

तामपश्यन्निपतितां वसुदेवः क्षितौ तदा ।
दृष्ट्वैव च पपातोर्व्यां सोऽपि दुःखेन मूर्च्छितः ॥ ५ ॥

वसुदेवजीने बेटी सुभद्राको पृथ्वीपर गिरी हुई देखा। देखते ही वे भी दुःखसे मूर्च्छित हो धरतीपर गिर पड़े ॥ ५ ॥

ततः स दौहित्रवधदुःखशोकसमाहतः ।
वसुदेवो महाराज कृष्णं वाक्यमथाब्रवीत् ॥ ६ ॥

महाराज! तदनन्तर दौहित्रवधके दुःख-शोकसे आहत हो वसुदेवजीने श्रीकृष्णसे इस प्रकार कहा— ।। ६ ।।

ननु त्वं पुण्डरीकाक्ष सत्यवाग् भुवि विश्रुतः ॥ ७ ॥
यद् दौहित्रवधं मेऽद्य न ख्यापयसि शत्रुहन् ।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 1891, कुल 2566 में से · BharatKosha