महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ
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ततो विवेश भवनं गान्धार्या सहितो निजम् ।
व्युष्टायां चैव शर्वर्यां यच्चकार निबोध तत् ॥ ५३ ॥
भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् धृतराष्ट्रने हाथ जोड़कर उन ब्राह्मण देवताका सत्कार किया और गान्धारीके साथ फिर अपने महलमें चले गये। जब रात बीती और सबेरा हुआ, तब उन्होंने जो कुछ किया, उसे बता रहा हूँ, सुनो ॥ ५३ ॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि प्रकृतिसान्त्वने
दशमोऽध्यायः ॥ १० ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें धृतराष्ट्रको प्रजाद्वारा दी गयी सान्त्वनाविषयक दसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १० ॥