महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2355, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रतप्तचामीकरशुद्धगौरः । पृथ्वायतांसः पृथुदीर्घबाहु- वृकोदरः पश्यत पश्यतेमम् ॥ ६ ॥ जो मतवाले गजराजके समान चलनेवाले, तपाये हुए सुवर्णके समान विशुद्ध गौरवर्ण तथा मोटे और चौड़े कन्धेवाले हैं, जिनकी भुजाएँ मोटी और बड़ी-बड़ी हैं, ये ही भीमसेन हैं। आप लोग इन्हें अच्छी तरह देख लें, देख लें। ॥ ६ ॥
यस्त्वेष पार्श्वेऽस्य महाधनुष्मान् श्यामो युवा वारणयूथपाभः । सिंहोन्नतांसो गजखेलगामी पद्मायताक्षोऽर्जुन एष वीरः ॥ ७ ॥ इनके बगलमें जो ये महाधनुर्धर और श्याम रंगके नवयुवक दिखायी देते हैं, जिनके कंधे सिंहके समान ऊँचे हैं, जो हाथियोंके यूथपति गजराजके समान प्रतीत होते हैं और हाथीके ही समान मस्तानी चालसे चलते हैं, ये कमलदलके समान विशाल नेत्रोंवाले वीरवर अर्जुन हैं ॥ ७ ॥
कुन्तीसमीपे पुरुषोत्तमौ तु यमाविमौ विष्णुमहेन्द्रकल्पौ । मनुष्यलोके सकले समोऽस्ति ययोर्न रूपे न बले न शीले ॥ ८ ॥ कुन्तीके पास जो ये दो श्रेष्ठ पुरुष बैठे दिखायी देते हैं, ये एक ही साथ उत्पन्न हुए नकुल और सहदेव हैं। ये दोनों भाई भगवान् विष्णु और इन्द्रके समान शोभा पाते हैं। रूप, बल और शीलमें इन दोनोंकी समानता करनेवाला दूसरा कोई नहीं है ॥ ८ ॥
इयं पुनः पद्मदलायताक्षी मध्यं वयः किंचिदिव स्पृशन्ती । नीलोत्पलाभा सुरदेवतेव कृष्णा स्थिता मूर्तिमतीव लक्ष्मीः ॥ ९ ॥ ये जो किंचित् मध्यम वयका स्पर्श करती हुई, नील कमलदलके समान विशाल नेत्रोंवाली एवं नील उत्पलकी-सी श्यामकान्तिसे सुशोभित होनेवाली सुन्दरी मूर्तिमती लक्ष्मी तथा देवताओंकी देवी-सी जान पड़ती हैं, ये ही महारानी द्रुपदकुमारी कृष्णा हैं ॥ ९ ॥
अस्यास्तु पार्श्वे कनकोत्तमाभा यैषा प्रभा मूर्तिमतीव सौमी । मध्ये स्थिता सा भगिनी द्विजाग्रया- श्चक्रायुधस्याप्रतिमस्य तस्य ॥ १० ॥