महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ
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२९- अर्जुन अपने पुत्र बभ्रुवाहनको छातीसे लगा रहे हैं ३०- महाराज युधिष्ठिरके अश्वमेधयज्ञमें एक नेवलेका आगमन ३१- महर्षि अगस्त्यकी यज्ञके समय प्रतिज्ञा ३२- विदुरका सूक्ष्मशरीरसे युधिष्ठिरमें प्रवेश ३३- व्यासजीके द्वारा कौरव-पाण्डवपक्षके मरे हुए सम्बन्धियोंका सेनासहित परलोकसे आवाहन ३४- साम्बके पेटसे यदुवंश-विनाशके लिये मूसल पैदा होनेका ऋषियोंद्वारा शाप ३५- वसुदेवजी अर्जुनको यादव-विनाशका वृत्तान्त और श्रीकृष्णका संदेश सुना रहे हैं ३६- अग्निकी प्रेरणासे अर्जुन अपने गाण्डीव धनुष और अक्षय तरकसको जलमें डाल रहे हैं ३७- देवदूतका युधिष्ठिरको मायामय नरकका दर्शन कराना