भारतकोश
महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)

महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)

Mahanirvana Tantra with Hindi Translation

शिव-पार्वती संवाद द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर · कल्याण मन्दिर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished139 पृष्ठ

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प्रकाशक पण्डित देवीदत्त शुक्ल स्मारक परा-वाणी आध्यात्मिक शोध-संस्थान कल्याण मन्दिर प्रकाशन श्रीचण्डी-धाम, प्रयाग-राज-२११००६ ☎ ९४५०२२२७६७ (हिन्दी) महा-निर्वाण तन्त्र हे शिवे! तुम साक्षात् परम ब्रह्म की परमा प्रकृति अर्थात् शक्ति हो। यह सारा जगत् तुम्हीं से उत्पन्न हुआ है। हे भद्रे! महत् तत्त्व से परमाणु तक और स्थूल-सूक्ष्म सारा स्थावर जङ्गम-स्वरूप जगत् तुम्हारे ही द्वारा उत्पन्न हुआ है। सारा जगत् तुम्हारे अधीन है। तुम सबकी आद्या अर्थात् आदि-भूता हो। सारी विद्याएँ और हम सब तुम्हीं से उत्पन्न हुए हैं। सारे जगत् के सभी विषयों को तुम जानती हो। तुम्हें कोई नहीं जान सकता। (पृष्ठ १६) तृतीय संस्करण चैत्र शुक्लाष्टमी, क्रोधी सं० २०६८ वि० (११ अप्रैल, २०११) सर्वाधिकार सुरक्षित परा-वाणी प्रेस 'श्रीचण्डी-धाम', अलोपी-देवी मार्ग, प्रयाग-राज (उ०प्र०)

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