भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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श्री सद्गुरुवेनमः

मनहिं निरंजन सबै नचाए

दूजे शब्द जु पुरुष परकासा । निकसे कूर्म चरण गहि आसा ॥
तीजे शब्द भयेजु पुरुष उच्चार। ज्ञान नाम सुत उपजे सारा ॥
टेकी चरण सम्मुख है रहेऊ । आज्ञा पुरुष द्वीप तिन्ह दएऊ ॥
चौथे शब्द भये पुनि जबही । विवेक नाम सुत उपजे तबहीं ॥
आप पुरुष किये द्वीप निवासा । पंचम शब्द सो तेज परकासा ॥
पांचव शब्द जब पुरुष उच्चार। काल निरंजन भो औतारा ॥

— सतगुरु मधु परमहंस जी

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सन्त आश्रम रॉजड्री, पोस्ट राया, ज़िला साम्बा ( जे. एण्ड के . )