भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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तेरा बैरी मन


तेरा बैरी कोई नहीं, तेरा बैरी मन

इस बात को गंभीरता से लेना होगा। क्या यह मन हमारा बैरी है? यह मन सच में हमारा बैरी है। तो कैसा है यह मन? हम सब इससे बेखबर क्यों हैं? क्या कर रहा है मन? कहाँ रहता है यह मन? मन को क्या पड़ी है हमें परेशान करने की? ये चंद सवाल हैं, जो बड़े अहम हैं। आदमी इनपर चिंतन नहीं कर रहा है।

मन को क्या पड़ी कि हम सबको इतना परेशान कर रहा है? आत्मा को आखिर मन क्यों उलझा रहा है? जैसे मनुष्य जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, पेट पालने के लिए नौकरी कर रहा है, मेहनत कर रहा है, ऐसे ही मन को क्या पड़ी है? इतना परेशान क्यों कर रहा है? कुछ तो वजह है।

प्रेतात्माएँ किसी में क्यों आती हैं? प्रेतात्माएँ तीन कारण से आती हैं। पहला तो इनको बदला चुकाना होता है। फिर दूसरा, इनकी वृत्तियाँ अच्छी नहीं हैं, विषय-विकारों के लिए आती हैं। एक बात ध्यान में रहे कि जो मर जाता है, उसकी जैसी वृत्तियाँ होंगी, वैसा ही होगा। इस तरह वो पहचान में आयेगा। जो जिस स्वभाव का है, मरने के बाद भी वैसा ही होगा।

पहली बात कि प्रेतात्मा किसी में भी प्रवेश लेती है—बदला लेने के लिए। दूसरा, विकारों के कारण, गंदे काम करने आती हैं। तो तीसरा, उन्हें एक शरीर चाहिए। तब कॉन्शिएस में प्रवेश लेती हैं। इसके लिए वो भोले लोगों के ढूँढ़ती हैं।

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