भारतकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

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१२ मनुस्मृति । ६ । ज्योतिष । ज्योतिष, सूर्य आदि देवता तथा ऋषियों का बनाया हुआ। जिसके सिद्धान्त, संहिता और होरा नामक तीन विशाल स्कन्ध हैं। ज्योतिःशास्त्र के कर्त्ताओं के नाम कश्यप ने अपनी संहिता में यों लिखे हैं— 'सूर्यः पितामहो व्यासो वशिष्ठोऽत्रिः पराशरः । कश्यपो नारदो गर्गो मरीचिर्मनुरङ्गिराः ॥ लोमशः ( रोमशः ) पुलिशश्चैव च्यवनो यवनो भृगुः । शौनकोऽष्टादशैवैते ज्योतिःशास्त्रप्रवर्त्तकाः ॥' अङ्गों की कल्पना । वेद और वेदाङ्गों का जिस क्रम से उल्लेख किया गया है वह अथर्ववेदीय-मुण्डकोपनिषद् के अनुसार है। और रूपक के अनुसार शब्दब्रह्म-वेद को पुरुषकल्पना करके उसके उपकारक शिक्षा आदि छः अङ्ग नासिका आदि अवयव (अङ्ग) कल्पना किये गये हैं। जैसा— 'छन्दः पादौ तु वेदस्य हस्तौ कल्पोऽथ पठ्यते । ज्योतिषामयनं चक्षुर्निरुक्तं श्रोत्रमुच्यते ॥ शिक्षाघ्राणं तु वेदस्य मुखं व्याकरणं स्मृतम् ॥' शिक्षा आदि छः अङ्गों की वेदोपकारकता सूर्यसिद्धान्त- समीक्षा¹ में यों दिखलाई है— 'स च यथा शिक्षया शिक्ष्यते स्वरवर्णाद्युच्चारणप्रक्रियया समुपदिश्यते, व्याकरणेन व्याक्रियते तत्तच्छब्दार्थान्वाख्यानेन व्युत्पाद्यते, निरुक्तेन निरुच्यते पदपदार्थनिर्धारणेन निरूप्यते, छन्दसां छाद्यते त्रयीत्वव्यपदेशबीजेन पद्यगद्यगानरूपेण ऋग्यजुः- १-यह ग्रन्थ उक्त द्विवेदी जी का बनाया है।