मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 367, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ेंसातवां अध्याय । २२७ पदार्थ हैं उनको वहां नियुक्त राजपुरुष ग्रहण करे । अर्थात् सब वस्तुओं का संग्रह करके राजस्थान को पहुँचाया करे ॥ ११४-११८॥ दशी कुलं तु भुञ्जीत विंशी पञ्चकुलानि च । ग्रामं ग्रामशताध्यक्षः सहस्राधिपतिःपुरम् ॥ ११९ ॥ तेषां ग्राम्याणि कार्याणि पृथक्कार्याणि चैव हि । राज्ञोऽन्यः सचिवः स्निग्धस्तानि पश्येदतन्द्रितः॥१२०॥ नगरे नगरे चैकं कुर्यात्सर्वार्थचिन्तकम् । उच्चैः स्थानं घोररूपं नक्षत्राणामिव ग्रहम् ॥ १२१ ॥ स ताननुपरिक्रामेत्सर्वानैव सदा स्वयम् । तेषां वृत्तं परिणयेत्सम्यग्राष्ट्रेषु तच्चरैः ॥ १२२ ॥ राज्ञो हि रक्षाधिकृताः परस्वादायिनः शठाः । भृत्या भवन्ति प्रायेण तेभ्यो रक्षेदिमाः प्रजाः॥ १२३ । दश गाँव का अधिपति एक कुल-दो हल से जोतने योग्य ज़मीन, अपने निर्वाह के लिए काम में लावे । बीस गाँव का पाँच कुल, सौ गाँव का एक साधारण गाँव और हज़ार गाँव का मालिक एक नगर को अपनी जीविका में भोगे । राजा के गाँवों के कार्य और दूसरे कार्यों को भी, एक मन्त्री, जो सर्वप्रिय हो, वह निरालस होकर देखे । प्रत्येक नगर में एक एक अध्यक्ष जो बड़े पद पर हो, तेजस्वी हो, उसको क़ायम करे । वह सदा ग्रामाधिपतियों के कार्यों को जाँचे और दूतों से उनके आचरणों को भी जान रखे । क्योंकि रक्षाधिकारी राजपुरुष, प्रायः दूसरों के धन हरनेवाले, वञ्चक होते हैं । राजा उनसे प्रजा की रक्षा करे ॥ ११९-१२३ ॥ ये कार्यिकेभ्योऽर्थमेव गृह्णीयुः पापचेतसः । तेषां सर्वस्वमादाय राजा कुर्यात्प्रवासनम् ॥ १२४ ॥