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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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परिवार व समाज के बीच हुए गहरे मतभेद की अभिव्यक्ति मिलती है। परिजनो और मीराँ के बीच हुए गहरे मतभेद और सघर्ष की अभिव्यक्ति नाभादास मे भी मिलती है। अन्य भक्त-गाथाओ व प्राप्त इतिहास मे भी इसका समर्थन मिलता है। समाज मे निन्दा होने के कारण परिवार- वालो ने मीराँ के साधु-समागर्म का गहरा विरोध किया। पदो से व्यक्त होती इस भावना को इतिहास व भक्त-कथाओ का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। ऐसे पद लगभग सभी कथोपकथन और वर्णनात्मक शैली मे प्राप्त है। अधिकांश पदो मे दोनो ही शैलियो का सम्मिश्रण हुआ है। भावावेश मे अपने उद्गारो को गा उठने वाली मीराँ द्वारा इन उपर्युक्त शैलियो मे रचना अयुक्त ही प्रतीत होती है। इन पदाभिव्यक्तियो से स्पष्ट हो जाता है कि यह कथनोपकथन मीराँ व माँ, ननद ऊदाँ बाई, सास और किसी राणा के बीच हुआ है। अद्यावधि मीराँ की माता का उनकी छोटी वयस मे ही निधन हो जाना मान्य है। प्रियादास कृत 'भक्तमाल' की टीका व अन्य उद्धरणो' के आधार पर भी पदो से व्यक्त होने वाले इस पहलू को सर्वथा अमान्य नही कहा जा सकता । ननद ऊदाँ बाई या सास के बारे मे भी वर्तमान इतिहास कोई सुनिश्चित हल नही दे पाता है। इसी तरह यह भी सुस्पष्ट नही हो पाता कि पदो मे वर्णित यह राणा कौन थे। पदाभिव्यक्ति के आधार पर यह राणा मीराँ के पति ही सिद्ध होते है। कुछ पदो ( स० ५) मे तो राणा के साथ हुए विवाह का विशद वर्णन भी है। इतना ही नही विभिन्न पदाभिव्यक्तियो से यह भी सुस्पष्ट हो जाता है कि इस विवाह कार्य को मीराँ की अनिच्छा और कठिन विरोध की अवहेलना कर सम्पन्न किया जाता है। प्राप्त इतिहास बताता है कि गृह-प्रवेश के साथ ही साथ मीराँ का अन्य परिवारवालो से देवी-पूजा के प्रश्न को लेकर विरोध हो गया था। राजस्थानी प्रथानुसार गृह-प्रवेश के अवसर पर देवी-पूजा का कोई प्रसग ही नही उठता। अस्तु बहुत सम्भव है कि विवाह के प्रति उदासीनता की कथावस्तु ही काला- न्तर मे देवी-पूजा के प्रति उदासीनता की कथा मे परिवर्तित हो गई हो। “लाजै कुम्भा जी रो वैसणो” जैसी कुछ पदाभिव्यक्ति के आधार पर यह कहा जा सकता है कि पदो मे वर्णित ये राणा सम्भवत मीराँ के पति राणा कुम्भ ही थे। “लाजै दूदा जी रो वैसणो” जैसी अभिव्यक्ति देखे, 'मीराँ, एक अध्ययन'—मातापिता