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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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उसकी चर्चा ठीक उसी रूप मे कर दी हो और कालान्तर मे कवि-हृदय का यह सत्य ही जनश्रुतियो मे वस्तुत 'सत्य बन गया हो । जो भी हो, यह तो निश्चित है कि विष-पान की जनश्रुति अन्य जनश्रुंतियो से बहुत पुरानी है क्योकि नाभादास मे भी इस की चर्चा मिलती है। "सूल सेज" और "साँप पिटूरा" भेजे जाने की अथवा "खड्ग" से हत्या के प्रयास की जनश्रुतियो का वर्णन रघुराजसिंह कृत 'भक्तनामावली' मे भी प्राप्त नही होता। अत यह सिद्ध हो जाता है कि इन का प्रचलन बहुत बाद मे हुआ है। फिर, एक ही कथा के कई विभिन्न रूप भी पाये जाते है। अत उनकी प्रामाणिकता और भी संदिग्ध है। उदाहरणार्थ "साँप पिटारा" की कथा है। यह साँप कही "सालिगराम की बटिया" मे, कही "चन्दन हार" मे और कही "मोतीडारो हारो" मे भी परिणतित हो जाता है। इन उपर्युक्त कथाओ के द्योतक कुछ इने-गिने पद वर्णनात्मक शैली मे ही प्राप्त है। अस्तु, ऐसी कथाओ को मीराँ के प्रति भक्तो की अतिरजित श्रद्धांजलि मात्र ही कहा जा सकता है। अभिव्यक्ति के आधार पर अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध होनेवाले ये सघर्ष द्योतक सभी पद राजस्थानी मे ही प्राप्त है। उपर्युक्त विभिन्न समूहो मे यही एक ऐसा समूह है जिसके पद केवल राजस्थानी मे ही प्राप्त है। इन प्राप्त पदो मे कुछ पद तो ठेठ पुरानी राजस्थानी मे प्राप्त है और शेष पदो की भाषा आधुनिक राजस्थानी है। मतभेद और सघर्ष द्योतक लगभग सभी पद वर्णनात्मक और कथो- पकथन की मिश्रित शैलियो मे प्राप्त है। शैली के आधार पर ये पद नौटकियो के पद्यबद्ध वार्तालाप कहे जा सकते हैं। पारस्परिक वार्तालाप के बीच- बीच मे कथा-वस्तु का वर्णन नौटकियो के लिये आवश्यक भी सिद्ध होता है। नौटकियो और रामलीला आदि करने वालो मे ऐसी परम्परा प्रचलित भी है। अपनी पुस्तक 'मीराँ बाई' मे पृष्ठ ११ पर डा० श्री कृष्णलाल लिखते है, "मध्य- कालीन भारत मे प्रमुख भक्तो और महापुरुषो की स्मृति अनेक गीतो, कथा-वार्ताओ और प्रसगो तथा रूपको द्वारा जीवित रखी जाती थी। कवि और गायक गीतो और पदो मे उन महात्माओ की कीर्त्ति गाते फिरते थे। वृद्धगण उनके सबन्ध मे अनेक कथा और प्रसग उत्सुक श्रोताओ को सुनाते रहते थे और संगीत अथवा छंदबद्ध वार्तालापो मे उनके जीवन के प्रमुख प्रसग रूपको के रूप मे प्रदर्शित किए जाते थे।" अस्तु, उपर्युक्त श्रेणी के पद