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मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)

Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)

DevanagariHindipublished173 pages

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१७० मुद्राराक्षस-

जिनको चोटी नही होती और उनका आकार दर्पण सा चिपटा और गोल होता है । रङ्ग जल मे पड़ा हुआ तैल के सदृश जान पड़ता ह । ये ईशान कोण मे उदय होते है । इन के उदय से भी भय उत्पन्न होता है और इनको मङ्गलभ्रातृ ५ कहते हैं । तीन केतु चन्द्रपुत्र है । इनका रूप चान्दी ऐसा श्वेत होता है, ये उत्तर दिशा मे देख पड़ते है, इनका दर्शन सुभिक्षकारक है । एक केतु ब्रह्मपुत्र है । इसको तीन चोटी होती है और तीनों तीन रङ्ग की । इसके उदय की दिशा का नियम नही, यह युगान्त मे उदय होता है ।

१० चौरासी शुक्रपुत्र है । इनका तारा शुक्ल और बड़ा होता है और इनका उत्तर और ईशान मे उदय होता है और तीव्र फल है । साठ शनैश्चर के पुत्र हैं । इनको दो चोटी होती है, आकाश मे सर्वत्र इनका उदय होता है और नाम कनक है, ये अतिकष्टद हैं ।

१५ गुरु के पुत्र विकच ना मक पैंसठ है, इनको चोटी नही होती, याम्य दिशा म उदय होते है, बुरे फल देते हैं । तस्कर नाम के इक्यावन बुध के पुत्र हैं, ये स्पष्ट दिखाई नही देते और लम्बे और श्वेत होते हैं, सब दिशाओं मे इनका उदय होता ह, ये भी बुरे फल देने वाले हैं । तीन चोटी के कौकुम २० नाम के मङ्गल के पुत्र साठ केतु हैं, ये उत्तर दिशा मे उदय होते है और बुरे हे, तेतीस राहुपुत्र तामसकिलक नाम के है, ये रवि, चन्द्रमा के साथ देख पड़ते है, इनका फल रविचार के अधीन हे । एक सौ बीस अग्नि के पुत्र विश्व-रूप नाम के हैं ये अग्निबाधा करने वाले हैं ।

२५ जिनकी चोटी चामर ऐसी और कृष्ण रङ्ग वर्ण की होती हैं वे वायुपुत्र हैं और उनका अरुण नाम है । ये पाप फल देनेवाले हैं और इनकी संख्या सतहत्तर है । बहुत तारोंवाले

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