मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ मुकुन्दमाल पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति, त दहं भक्त्युपहृत मश्नामि प्रयतात्मनः. -- गीत. ९.२६ अन्नट्लु पत्रमु पुष्पमु फलमु तोयमु देनैननु भक्तितो समर्पिम्प नगुनु. भगवंतुडु मिगुल सुलभुडु. अंदुचेत पदुगुरिकि पेट्टुटयु ओक यज्ञमै युन्नदि. येषा मर्थे कांक्षितं नो राज्यं भोगास्सुखानि च, त इमे ऽवस्थिता युद्धे प्राणां स्त्यक्त्वा धनानि च. -- गीत. १.३३ भीष्मादुलु पोयिन पिम्मट मनकु सुखमु लेल यनि अर्जु नुडु कूड चेप्पॆनु. इत्यादि कारणमुलचेत ता ननुभविंचुट कंटेनु इतरुलनु अनुभविंपजेयुट श्रेष्ठमु. ई तात्पर्यमु नेरिं गिनवा रगुटचेतने कुलशेखरुलु श्रीरंगयात्रयंदु ताम अभिरुचि गॊन्नवारै अंतटितो तृप्तिपॊंदक तम प्रज लॆल्लरुनु आ भाग्यमु ननु भविंपवलयुननु कोरिक गलिगियुंडिरि. कॊंटे बालुडु औषधमुनु पुच्चुकॊनुटकु सम्मतिंपक मॊंडि केत्तिनपुडु तंड्रि वानिनि शिक्षिंचि यैननु औषधसेव चेयिंचुट आवश्यकमैनट्लु कुलशेखरुलु रजोगुण समुद्भवमुलैन रागद्वेषमुलकु जिक्कि भगवद्भक्ति सेयक संसारसागर मुनबडि मुनुगुचुंडु पामरजनुलनु शिक्षिंचि इदिगो! रंगयात्रकु बोवुचुन्नारमु अनि पलुकुनट्लु चेसिरि. निषिद्ध विषयमंदलि प्रेम रागमनबडुनु. अनिषिद्ध विषयमुन जेयु विरोधमु द्वेष मनबडुनु. इंद्रियस्येंद्रिय स्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ, तयोर्न वश मागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपंथिनौ. -- गीत. ३.३४