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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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निराले सद्गुरु
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पर आप जिस भी धर्मस्थान पर गये, वहाँ आप की बात हुई। यदि शिवजी के स्थान पर गये तो शिवजी से बात की, यदि हनुमान जी के स्थान पर गये तो उनसे बात की, यदि माता के स्थान पर गये तो उनसे बात की, यदि गंगा जी के पास गये तो उनसे भी बात की। यह सब वहाँ मौजूद होते हैं, पर आम आदमी तो ऐसे ही वापिस आ जाता है, वो बात करना नहीं जानता। पर आप सबसे बात करते हैं।


ऐसे हैं आपके काम

जम्भाल जी कहते हैं कि साहिब मेरा नौकर है। एक समय डोडा में कर्फ्यू लगा था और वे भी वहाँ थे। वे सड़क पर खड़े थे। एक आदमी को वहाँ खड़े डी. एस. पी. ने चाँटा मारा, कहा कि यहाँ क्यों खड़े हो! जम्भाल जी ने सोचा कि मेरी भी बारी आई। पर डी. एस. पी. ने उनके पास आकर कहा कि आपको कहाँ जाना है? जम्भाल जी ने कहा कि उधमपुर। डी. एस. पी. ने कुछ न कहा; वो आगे चला गया। इतने में एक मोटरसाइकिल वाला वहाँ आया। डी. एस. पी. ने उसे रोका, पूछा कि कहाँ जा रहे हो? उसने कहा कि उधमपुर। उसने जम्भाल जी के लिए कहा कि उन्हें भी साथ लेते जाओ। ये थे आप। जब उधमपुर आया तो मोटरसाइकिल वाले ने कहा कि उतरो। फिर कहा कि अच्छा जाना कहाँ है? जम्भाल जी ने कहा कि आगे तक। उसने कहा कि मुझे भी जाना है,