निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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वर्णन करते-2 वाणी मौन हो जायेगी और वो शब्द नहीं मिल पायेंगे, जिनसे आपके गुणों का पूरा-पूरा वर्णन किया जा सके। सबसे पहले तो आपको कोई पूर्ण रूप से जान ही नहीं पायेगा। यदि कुछ जाना भी तो उसे वाणी में प्रकट नहीं कर पायेगा। यदि किया भी गया तो वो पूरा-पूरा, सही-सही वर्णन नहीं होगा, केवल उसका संकेत मात्र ही हो पायेगा।
ज़रूरत पड़ने पर मुर्दों में भी प्राण फूँकते हैं आप
आपने कई बार मरे हुओं को जीवित किया है, पर आप यह काम तमाशे के लिए नहीं करते। यही कारण है कि दुनिया को इन बातों की ख़बर नहीं हो पाती है। यदि कोई सिद्ध छोटा-सा करिश्मा दिखाता है तो दुनिया बांवरी होकर उसके पीछे भागने लग जाती है। वो तो शोहरत कमाने के लिए ऐसा करता है। क्योंकि उसके पास आत्मज्ञान नहीं है, यह सब ही है। वो तमाशे ही दिखाकर लोगों को इकट्ठा करेगा। जिसके पास जो है, वो दिखाना चाहता है, दूसरों को भी देना चाहता है। इसलिए महापुरुष ये काम नहीं करते, बल्कि वे आत्म ज्ञान द्वारा लोगों को अपनी ओर खींचते हैं। उनके पास परम सिद्धि आत्मज्ञान होता है।
ये जो करिश्मे हैं, ये आप सहज में कर देते हैं। इनका दिखावा नहीं करते हैं आप। ये तमाशे आप दुनिया तक नहीं पहुँचाना चाहते हैं। ये तो केवल कभी ज़रूरत पड़ने पर आप मजबूरी में कर दिया करते हैं। आप तो अपने ज्ञान को ही दुनिया तक पहुँचाना चाहते हैं ताकि आत्मा का कल्याण हो सके। बाकी इन चमत्कारों को दिखाने वालों की पहुँच ही यहीं तक होती है तो वो बेचारे भी क्या करें, यही सब दिखायेंगे।
आप यह सब तब करते हैं, जब कोई मजबूरी हो और वो भी बिना दिखावे के। उदाहरण के लिए जब आपके एक नामी की करंट लग जाने से मृत्यु हो गयी तो सबने आपसे कहा कि वो चला गया है, लोग बातें करेंगे कि साहिब बंदगी का था। आप दुनिया की चिंता ही नहीं करते