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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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14 <p align="right">साहिब बन्दगी</p>

शरीर रूपी कैद खानों से आत्मा को आज़ाद करवाने के लिए पूर्ण संत सद्गुरू से विदेह नाम लेना पड़ेगा। बिना विदेह नाम के जीव आत्मा सन्तलोक नहीं जा सकती।

निरंजन ने जिस बीज रुपी पाँच शब्दों से पांच तत्व के शरीर की रचना की उन शब्दों का स्थान भी शरीर में रख दिया। जिसे काया का नाम कहते हैं। जीव आत्मा को सत्य पुरुष से दूर रखने के लिए काल निरंजन ने जीवों को अपनी भक्ति में लगाने के लिए काया नाम के प्रगट शब्द गुरु मंत्र के रुप में जीवों को दीये जिसमें सभी जीव काया के नाम का सिमरन करने लगे और अन्दर में खोज करने लगे। बड़े-बड़े ऋषी, मुनि, सिद्ध, साथक, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, पीर, पैगम्बर, औलिया भी इन शब्दों में उलझ गये। निरंजन ने इस भक्ति से जीव को बड़ी-बड़ी शक्तिया, रिद्ध, सिद्ध, पावर, चार तरह की मुक्ती का स्वर्ग दे दिया, यहां तक के सभी साधक निरंजन भगवान् की साधना में रम गए और 70 प्रकार की अनहद धुनों में आनन्द मगन रहने लगे और चुप्प रह कर अनहद धुनों का रस लेने के लिए एकांत की तालाश में रहे। मगर आत्मा का ज्ञान न हुआ ऐसे में आत्मा शरीर से अलग ना हो कर अमर लोक अपने निज धाम न जा सकी।

<p align="right"><i>-विसथार के लिए देखें पुस्तक अनुराग सागर वाणी</i></p>

सुन्न गगन में सबद उठत है, सो सब बोल में आवै।

निःसबदी वह बोलै नाहीं, सो सत सबद कहावै॥

<p align="right"><b>-पलटू साहिब जी</b></p>

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