निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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महात्माओं के संपर्क में आया, उन्हें देखा, पर कोई मुझे जंचा नहीं। पहले एक के पास गया तो वहाँ देखा कि बाबा जी सोया है तो 4 बंदूक वाले आगे तो 4 बंदूक वाले पीछे पहरा दे रहे हैं। फिर बुलिट प्रूफ कैबिन के अंदर से वो सत्संग करता था। मैंने सोचा कि इसने संगत के लिए कुछ नहीं सोचा और अपनी सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया हुआ है। यदि इसे खुद अपनी जान के लाले पड़े हुए हैं तो हमें निर्भयता कैसे प्रदान करेगा! एक महात्मा को किसका डर! यह सोच मैं वहाँ से बिना नाम लिए ही चला आया। फिर कहा कि मैं भारत के बहुत बड़े पंथ से जुड़ा। पर मैंने देखा कि वहाँ पैसे का सौदा था। पैसे वालों के लिए इंतजाम अच्छा था, ग़रीबों के लिए बेकार। कुल मिलाकर अच्छा नहीं लगा। फिर जम्मू आया तो आपकी बड़ी निंदा सुनी। आपको भी देखा। मैंने चुपके से आपको देखा। मैंने देखा कि आप सबसे निराले हैं, सब काम खुद करते हैं, कहीं पतीला माँजने लग जाते हैं, कहीं कुछ। फिर आप फकड़ टॉइप लगे। आप निडर होकर घूमते रहते हैं। कोई बॉडीगार्ड भी नहीं है आपका। मैंने आपको परख लिया है; अब मुझे नाम दे दो।
लोग मोटे-मोटे महात्माओं को देख रहे हैं तो सोच रहे हैं कि वाह! क्या महात्मा है! एक ने आपसे कहा कि बड़े दुबले हो; हमारे गुरु जी तो लाल, गोल-मटोल हैं। आपने कहा कि तुमने यह कभी सोचा है कि उन्हें कितनी परेशानी है। मैं जानता हूँ कि क्या करते होंगे। जितना खाया, उतना फैलेगा। कण्ट्रोल नहीं किया। जमकर खाया; रोग हो गये। आपने कहा कि गुरु जी को मेरे हवाले करो। जहाँ-जहाँ मैं जाऊँगा, उनको साथ-साथ ही रखूँगा; जो-जो करूँगा, उनसे भी करवाऊँगा। 15 दिन में वो ऐम्स में मिलेंगे। बेटे, उसने मेहनत नहीं की, इसलिए रोग आ गया मोटापे का।
कुछ कहते हैं कि हमारा गुरु जी तो हमें कुछ कहता ही नहीं है; कहता है कि जैसे चाहे वैसे रहो। आपने कहा कि फिर वो कोई सुधार