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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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निराले सद्गुरु
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आपने कहा कि सब कुछ गुरु जी का है, तो यह क्या किया! फिर आश्रम के लोगों ने 4-5 मरले और ले लिये। वो समर्पित था, पर वो दुखी था। उसने कहा कि गाँव के लोग और मेरा भाई कहता है कि कैसा है तेरा साहिब! तू तो कहता है कि कभी गलत नहीं करते हैं, फिर यह क्या है! मैं उनके आगे बात नहीं कर पाता हूँ। आपने कहा कि यदि तुझे भरोसा है कि तुम्हारी है तो चुपके से परिवार से नक्शा ले आओ। वहाँ की ज़मीन सस्ती थी, कोई 10-12 हज़ार की होगी। आपने कहा कि तू नक्शा ले आ, यहाँ तक तेरी ज़मीन होगी, वहाँ तक एक मिनट में छोड़ दूँगा। यदि वहाँ तक कुल्ला भी आयेगा तो उसे भी तोड़ दूँगा। आप सावधान हैं कि कहीं किसी के साथ नाइंसाफ़ी न हो। किसी की सूई भी नहीं लेना चाहते हैं आप।

आप लगातार आश्रम बनाते जाते हैं, किसी से माँगते भी नहीं। कभी पैसे नहीं होते तो उधार लेते हैं, और उसे अपनी डायरी में लिख देते हैं। कई जो अपनी इच्छा से दे देते हैं, कहते हैं कि होंगे तो वापिस दे देना। तो भी आप उन्हें वापिस कर देते हैं। चाहे कितना भी समय क्यों न हो जाए, आप किसी का कुछ नहीं रखते हैं। किसी को भी किसी तरह से आप दुख नहीं देना चाहते हैं। इसलिए यदि कोई आपकी निंदा कर रहा है, वो निहायत ही गंदा, बदतमीज और जानवर से भी नीचे होगा, जिसे कुछ भी सूझता नहीं है।

मच्छर तक को नहीं मारते हैं आप

जब मच्छर काटते हैं तो आप उन्हें मारना नहीं चाहते हैं। आप उन्हें मारना भी पाप ही मान रहे हैं। आपका मानना है कि इन्हें भी तो अपनी ख़ुराक चाहिए। पर ऐसा भी नहीं है कि आप मच्छरों के काटने के लिए अपने शरीर को रख दें। आप मच्छरदानी लगा लेते हैं या पंखा चला लेते हैं, पर कभी उन्हें मारते नहीं हैं। यदि कोई ज़्यादा तंग करे तो