निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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आप साधारण नहीं हैं। हम इधर-उधर लड़कियों की तरफ भी देख लेते हैं; ध्यान चला जाता है। पर आप हैं कि इतना कण्ट्रोल है कि इधर-उधर देखने वाली बात ही नहीं है। आपका कण्ट्रोल भी साधारण नहीं है। आप बड़े एकाग्र हैं; आप सौम्य हैं; आप बड़े गंभीर हैं। वो मनोविज्ञान का ही प्रोफेसर था। फिर उसने अपना परिचय भी दिया। आपसे कहा कि आप बोलना क्यों नहीं चाह रहे हो? मुझे अपना परिचय दो। तब आपने उसे अपना परिचय दिया और न बोलने का कारण भी बताया। फिर उसने आपका पता लिया।
मानव बस की बात नहीं है, रहते जैसे आप। या तो महापुरुष हो कोई, या फिर हो करतार। मैं देखा, तुम नहीं साधारण है तुममे कुछ खास। कहो भेद कौन हो तुम? कहाँ तुम्हारा बास? बोले साहिब मैं साधारण, मानव मेरी जाति। राँजड़ी गाँव करूँ बसेरा, जीता जीवन साध॥
गहरी सुरति देनी पड़ी आपको
लोग आपको बहुत परेशान करते हैं। एक स्त्री के पति को लकुआ मार गया था। वो कहने लगी कि पूरे रिश्तेदार तंग करते हैं, जीने