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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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निराले सद्गुरु                          55

नाम हो, वो जानता है कि इसी से मनुष्य के मन को साफ़ करके उसे अच्छा बनाया जा सकता है।

नाम बिना हृदय शुद्ध न होई। कोटिन भांति करे जो कोई॥

साहिब की वाणियाँ इस बात को स्पष्ट कर रही हैं कि नाम के बिना मन अच्छा नहीं हो सकता है, चाहे कोई करोड़ों उपाय क्यों न कर ले। फिर जो अन्य उपायों का सुझाव दे तो यही समझना चाहिए कि उसके पास नाम का होना तो दूर, उसे इस नाम के बारे में कोई ख़बर ही नहीं है।

बाकी जितने भी गुरु लोग हैं, वो जो नाम दे रहे हैं, वो निरंजन का है। निरंजन यानी मन। मन के नाम द्वारा मन को ही मारने की बात सोची भी कैसे जा सकती है! इसलिए मन को मारने के लिए जो परम पुरुष का सच्चा नाम चाहिए, वो केवल सद्गुरु के ही पास मिल सकता है। यह नाम किसी बिरले संत के पास ही होता है। जब-जब दुनिया इस नाम से बेख़बर हो जाती है तब-तब कबीर साहिब यह नाम लेकर निरंजन के संसार में आते हैं और जीवों को यह नाम रूपी अमोलक वस्तु देकर उनके मन को निर्मल करके उन्हें अपने देश अमर लोक ले जाते हैं।

हरेक अपने गुरु के लिए बढ़ा-चढ़ाकर कहता है। इसलिए आपकी सही तस्वीर संसार के सामने रख पाना बड़ा कठिन कार्य हो जाता है। पर सत्य है कि आप ही साहिब हैं। इसमें कुछ भी बढ़ा-चढ़ाकर कहने वाली बात नहीं है। यह एक परम रहस्य है। आपसे नाम पाकर कुछ हद तक इस रहस्य को समझा जा सकता है। जो खोजी होगा, वो अवश्य ही इस रहस्य को समझ जायेगा।

कहने का भाव है कि अभी तक यह नाम किसी के पास नहीं है। यह आपसे ही प्राप्त किया जा सकता है। इस नाम के दाता इस युग में अभी तक आप ही हैं अन्य कोई नहीं। आपका नाम सबसे निराला है। आपका नाम काल के चंगुल से छुड़ाने वाला है। आपना नाम इंसान को निर्मल

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