निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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Read in context| 68 | साहिब बन्दगी |
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अब ऐसे असहाय के, जिसका कोई नहीं हो, आप सहारे बन जाते हैं। जिन ग़रीबों को दुनिया ठुकराती है, उन्हें आप अपनी कृपा का सहारा देते हैं। बस, फिर क्या था ! अगले ही दिन से सारा माहौल बदल गया। तीसरे दिन उसकी दादी स्वयं ही वहाँ आ गयी और अपने उस वारिस के लिए सबकुछ सुरक्षित करने के लिए, उन धोखेबाजों से बचाने के लिए जुट गयी। यह सब आपका ही काम था। उस समय आप ही सिर ऊपर बैठकर सारा काम करवाने लगे और कुछ ही दिनों में सारा हक़ उसे वापिस मिल गया।
वो बोली-मुझे करेंट पड़ रही है
कटड़े में एक छज्जू राम हैं, जो मखाने वाले के नाम से वहाँ मशहूर हैं। उनके घर में कोई औलाद नहीं थी। बात यह थी कि छज्जूराम की बहन किसी कारण से जलकर मर गयी थी। अब वो उसकी पत्नी के घर में बच्चा नहीं होने दे रही थी। वो उसे सामने दिख जाती थी। वो 4 साल नंगे पाँव माता के दरबार में जाते रहे थे। वो कहती थी कि कहीं भी जाओ, पर मैं बच्चा नहीं होने दूँगी। पाँच बार उसने गर्भ गिरा दिया था। वहाँ एक आपका नामी उनसे मिला तो कहा कि एक बार साहिब के यहाँ भी चलकर देख लो। वो जब आपके पास आए तो आपने कहा कि विश्वास रखो और नाम ले लो। उन दोनों ने आपका नाम ले लिया और आपकी फोटो लेकर घर आ गये। घर आकर पत्नी ने आपकी फोटो कमरे में लगा दी। अब जब गर्भ स्थापित हुआ तो वो आई, पर आपकी फोटो को देखकर पास न आ सकी और दूर से ही बोली कि इस सफेद कपड़े वाले की फोटो को हटा, मुझे करेंट पड़ रही है, मैं रुक नहीं पा रही हूँ। यह कहकर वो चली गयी और फिर दुबारा लौटकर नहीं आई।