निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
Page 74 of 112
Read in context74 साहिब बन्दगी
जब कोई आपको अपनी समस्या बताता है तो आप उसे यह नहीं कहते कि जाओ, तुम्हारा काम हो जायेगा। क्योंकि यह तो शब्द हो गया। फिर वो होना-ही-होना है। आप दिन भर लोगों की समस्याओं को सुनते हैं और रात को उसकी पूरी रील खोलते हैं। फिर जिस-जिस की समस्या का समाधान करना होता है, या जो कृपा के लायक समझते हैं, उनकी समस्या को चुपके से सुलझा देते हैं।
शब्द क्यों नहीं देते हैं आप? इसके पीछे एक रहस्य है। एक बार एक माई आपके पास आई। उसने फ़रियाद की कि उसके कोई संतान नहीं है; उसे बच्चा दो। आपने कहा-जाओ, पुत्र होगा। आपने शब्द दे दिया। रात को आपको सिग्नल मिला कि आज ठीक नहीं हुआ। जिस स्त्री को पुत्र होने का शब्द मिला है, उसके तो गर्भाशय ही नहीं है। अब पुत्र कैसे हो! तब उस स्त्री का गर्भाशय स्थापित किया गया और फिर उसे पुत्र हुआ। उसके बाद आपने किसी को भी शब्द नहीं दिया। हज़ारों माइयों को आपने पुत्र दिया। पर यह कहकर नहीं दिया कि पुत्र हो। आपने यही कहा कि भरोसा रखना। हज़ारों लँगड़ों की टाँगें आपने ठीक कर दी, पर किसी को नहीं कहा कि ठीक हो जायेगी। आपने भरोसा रखने के लिए कहा। हजारों लायलाज बीमारियों वाले आपके पास आकर ठीक हुए, पर आपने केवल भरोसा रखने के लिए ही कहा, शब्द नहीं दिया कि ठीक कर दूँगा। फिर तो आप शब्द में बँध जाते। फिर यदि वो कृपा का पात्र न होता तो भी आपको उसे ठीक करना पड़ जाता। एक नहीं, दो नहीं, सैकड़ों मृतकों को आपने नवजीवन दिया, पर किसी को यह नहीं कहा कि अभी जीवित करता हूँ। जिसे जीवित करना ज़रूरी समझा, उसे कर दिया। यह रहस्य पुनः जीवन प्राप्त किये हुए ही जानते हैं। यदि आप पहले ही कह देते कि जीवित कर देता हूँ तो गलत भी हो सकता था। यदि वो कृपा का पात्र न होता तो गलत हो जाता।