निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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आपके पास हज़ार रुपया भी नहीं मिलता है
एक बार काबला सिंह जी आपके पास आए, कहा कि मैं अपनी 40 कनाल ज़मीन को बोरिंग कराना चाहता हूँ, बताओ कि किससे करवाऊँ? आपने बता दिया कि फलाने से करवाओ। अचानक आपको एक आश्रम से फ़ोन आया कि यहाँ काम लगा है, सामान ख़त्म हो गया है, पैसे चाहिए और सेवा के लिए लड़के भी भेजो। आपके पास पैसे ही नहीं थे। आपको पता था कि काबला सिंह महीना लगायेगा काम शुरू करने में। तो आपने काबला सिंह को कहा कि मुझे एक लाख उधार दे दो, बाद में जब काम लगवाओगे तो ले लेना। उन्होंने दे दिये। बाद में एक महीने बाद वे आए, कहा कि मशीन लगवाई है, पैसे चाहिए। पूर्णिमा के दिन 10 लाख मिले थे, वे पाँच मिनट में ख़त्म हो गये थे। तब आपको अन्य किसी से लेकर उन्हें देने पड़े।
आपका कोई बैंक में भी पैसा जमा नहीं है। आप कोई भी पैसा अपने पास नहीं रखते हैं। बाकी महात्माओं की तरह न आपका कोई बैंक में खाता है, न आप अपने घर में देते हैं। आपने तो शादी ही नहीं की और न ही अपनी माँ, अपने भाई, अपनी बहन या अपने रिश्तेदारों को ही कभी संगत का एक पैसा ही दिया।
आप संगत का पैसा संगत की सेवा में ही लगा देते हैं; आश्रम पर आश्रम बनाते जाते हैं; रोज़-रोज़ उनके लिए जहाँ सत्संग होता है, वहाँ भण्डारा खोल देते हैं। जब यात्रा होती है तब तो कहना ही क्या! माँ भी इतना नहीं खिलाती। क्योंकि आपको पाखण्डियों की तरह वो पैसा अपने निजी काम के लिए तो रखना ही नहीं है। उलटा आप उधार लेकर संगत को खिलाते हैं। आप पर 50 लाख से ऊपर उधार रहता ही है। यानी आप अपने को गिरवी रखकर संगत की सेवा कर रहे हैं।