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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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साहिब बन्दगी

इसलिए लड़कियों की शादियाँ

करवाते हैं आप

एक लड़की आपसे नाम लिये थी। उसकी शादी थी। सब आपके पास सुबह आए। लड़का नामी नहीं था। आपने लड़की की सास से कहा कि लड़की बाकी चीजें नहीं करेगी, एक परम-पुरुष की भक्ति करेगी। पहले बताना ही ठीक है; ताकि बाद में यह नहीं कहे कि किसी को नहीं मान रहे हैं। मान रहे हैं न। एक परम पुरुष को मान रहे हैं। पर लड़की की सास कहने लगी कि हम जहाँ भी जायेंगे, इसे भी साथ में ले जायेंगे; जहाँ माथा टेकेंगे, यह भी टेकेगी। पर लड़की यह सब नहीं करना चाहती थी।

यही कारण है कि आप लड़कियों की शादियाँ करवाते हैं और उनके लिए नामी लड़का ही ढूँढ़ते हैं। लड़की गैरनामी हो तो ठीक है; पर उस पर भी आप यह दबाव नहीं डालने देते कि नाम ले। वो उसकी मरजी है कि किसी को भी माने।

विश्राह में आपका एक नामी अपनी लड़की की शादी नौग्राम में करना चाहता था। एक शास्त्री का बेटा था लड़का। अब शास्त्री आपका कट्टर विरोधी था और लड़के वाले सारे उसके कट्टर अनुयायी थे। फिर वहाँ लड़की व्याहेंगे तो दिक्कत तो आयेगी। आपने कहा-नहीं, मैं चाहता हूँ कि लड़की गैरनामी के पास न जाए। क्योंकि फिर वो बाद में सताते हैं। इसलिए परेशान किया जाता है। गाँव वाले जानते हैं कि यह तो सारे परिवार को साहिब के यहाँ ले जायेगी, इसलिए सभी उसे परेशान करते हैं, जबरन उससे सब कुछ करने को कहते हैं। इसलिए लड़कियों की शादियाँ करवाना आपकी एक मजबूरी भी है।