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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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निराले सद्गुरु | 83

हरेक की शंका मिटा देते हैं आप

चण्डीगढ़ में एक जज साहब हैं। वे बड़े ही ईमानदार हैं। आपने उनसे कहा कि घूस नहीं लेना। पहले वे वकील थे। महीने में 4-5 लाख कमा लेते थे। जब जज बने तो आपसे पूछा कि क्या करूँ? आपने कहा कि जज वाली नौकरी कर लो। उन्होंने कहा कि वहाँ 50 हज़ार तनख़्वाह है जबकि यहाँ 4-5 लाख मैं कमा लेता हूँ महीने में। आपने कहा-यह मत सोचो। वहाँ आपको इंसाफ़ करने का मौका मिलेगा। पैसा ही सब कुछ नहीं है। आप जज बन जाएँ और लोगों को इंसाफ़ दिलाएँ। उसने आपको बाद में फ़ोन किया-कहा कि मैं ओथ (शपथ) तब लूँगा, जब आप यहाँ आयेंगे। जब दिल में ऐसा भाव था तो आपको जाना ही पड़ा। तब उन्होंने ओथ ली।

तो एक दिन आपका चण्डीगढ़ में प्रोग्राम था। उनको पता चला तो कहा कि वहाँ मेरे एक जज मित्र हैं; मैं उनको फ़ोन करता हूँ; वे आपके दर्शन के लिए आयेंगे। वे पंजाब हाईकोर्ट के जज हैं। उन जज साहब ने आपको फ़ोन किया और अपने घर चरण रखने को कहा। आपने सोचा कि ठीक है, मैं ही चला जाता हूँ। वहाँ सत्संग के बाद आप उनके घर गये तो उनकी बहुत सारी शंकाएँ थी। जज कोई मामूली चीज़ तो होते नहीं हैं। उन्होंने अपराध होते तो देखा होता नहीं है, पर फिर भी गवाहों और तर्कों के आधार पर जान जाते हैं कि अपराधी कौन है। तो आपकी उनसे आधा घण्टा बात हुई। उनकी उम्र भी कोई 55 साल के करीब होगी। और अपने दोस्त यानी आपके नामी की संगत में रहने के कारण ईमानदार भी बहुत थे। वे कोई गलत फैसला करने वालों में नहीं थे। बड़े गंभीर थे। उन्होंने कहा कि मुझे बहुत ख़तरनाक जजों में गिना जाता है। क्योंकि मैं घूस भी नहीं लेता हूँ। उन्होंने कई सवाल पूछे। आपने हरेक सवाल का बड़ा सुन्दर जवाब दिया, बड़े सरल तरीके से समझा