निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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होती है। यदि हिंसा का जबाब वे हिंसा से दें तो फिर उनमें और दूसरों में अंतर क्या रहेगा! जो सहनशीलता आपकी संगत ने दिखाई, उसका उदाहरण कहीं नहीं मिल सकता है। जहाँ कहीं वो परेशान हुई, जोश में आई, आपने उसे रोक लिया। आपने बार-बार समझाया कि यह मत सोचो कि तुम ही मेरे हो और वे कोई बेगाने हैं। वे भी मेरे ही हैं, मेरे पास ही आयेंगे। और ऐसा हुआ भी। 1-2 नहीं, 10-20 नहीं, 100-200 भी नहीं, हज़ारों कट्टर विरोधी आपके शिष्य हो गये और कइयों ने पछताकर आपसे क्षमा माँगी, आपको सच्चा महात्मा कहा। यह कोई मामूली बात नहीं है। ऐसा उदाहरण कलयुग में कहीं नहीं मिलेगा। आप जैसा व्यवहार कहीं मिल पाना संभव ही नहीं है।
चौकीचौरा में सत्संग था; कुछ बदमाश आए, कहा-सत्संग नहीं होने देंगे। आपने कहा कि यात्रा से आना है, चाय-पानी पीना है। कहा- यहाँ नहीं होने देना है। आपने कहा कि लड़ाई करना ठीक नहीं है, इसलिए आप खुद पास के थाने में गये, वहाँ कहा कि ऐसी-ऐसी बात है। उन्होंने कहा कि यहाँ के सरपंच ने ऐसा कहा है। आपने कहा कि लिख कर दो कि नहीं होने देना है सत्संग। उसने लिख दिया। आपने कहा कि यह आपने अच्छा किया। आपने बाद में केस कर दिया कोर्ट में। सालों से वो चक्कर काट रहे हैं कोर्ट के। यदि कोर्ट छोड़ दे तो आप हाई कोर्ट में अपील कर देंगे। यदि वहाँ भी छूट गये तो सुर्प्रीम कोर्ट में करेंगे। बाल सफेद कर देते हैं, पर छोड़ते नहीं और आख़िर जीतते ही हैं। ऐसे लोगों से पहले आप कानून से निपटते हैं। आप तो हारकर भी जीतते ही हैं। क्योंकि केवल कानून से ही नहीं निपटते, कुछ अंदर की बात भी होती है। रातों की नींद, दिन का चैन भी छिन जाता है ऐसे लोगों का। यदि कानून भी इंसाफ़ नहीं करे तो आपके सोटे को वो सज़ा देनी पड़ती है।
एक वकील ने कुछ गुण्डों को लेकर आश्रम की पाइप तोड़ी। आपने केस दर्ज करवाने को कहा तो केस रजिस्टर न करें वो। फिर