नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary
आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवार्तासमुद्देशः ३७ राजा के लिये बन्धुओं की भांति पोष्यवर्ग— वृद्धबालव्याधितक्षीणाम् पशून् बान्धवानिव पोषयेत् ॥ ९ ॥ बूढ़े, बच्चे, रोगी और जर्जर पशुओं का पोषण अपने बान्धवों की तरह करे। पशुओं की अकाल मृत्यु का कारण— अतिभारो महान् मार्गश्च पशूनामकाले मरणकारणम् ॥ १० ॥ बहुत अधिक बोझ ढोना, बहुत मार्ग चलना पशुओं की अकाल मृत्यु का कारण होता है। राज्य में बाहरी माल न आने के कारण— शुल्कवृद्धिर्बलात् पण्यग्रहणञ्च देशान्तरभाण्डानाम्प्रवेशे हेतुः ॥११॥ कर वृद्धि और विक्रय योग्य वस्तुओं का अधिकारियों आदि के द्वारा बलात् ले लिये जानेसे देशान्तर से बिक्री की चीजें आना बंद हो जाता है। बेईमानी सदा नहीं सफल हो सकती— काष्ठपात्र्यामेकदैव पदार्थो रध्यते ॥ १२ ॥ काठ की हांड़ी में एक ही बार भोजन पकाया जा सकता है। अर्थात् बेईमानी एक ही बार चल सकती है। मापों की शुद्धता की आवश्यकता— तुलामानयोरव्यवस्था व्यवहारं दूषयति ॥ १३ ॥ तराजू और बांट की गड़बड़ी से व्यापार बिगड़ता है। कृत्रिम मंहगाई के दुष्परिणाम— वणिग्जनकॢप्तोऽर्घः स्थितानागन्तुकांश्च पीडयति ॥ १४ ॥ जब वनिये वस्तुओं का मूल्य अपने मन से बढ़ा देते हैं तो उस से वहां के रहने वालों को और बाहर से आने वालों को कष्ट होता है। वस्तुओं का मूल्य निश्चित करने में आवश्यक विचार— देशकालभाण्डापेक्षया वा सर्वार्घो भवेत् ॥ १५ ॥ समय देश और विक्रय की वस्तुओं का विचार कर के वस्तुओं का मूल्य स्थिर करना चाहिए। बाजार के विषयमें राजा को स्वयं सतर्क रहना चाहिए— पण्यतुलामानवृद्धौ राजा स्वयं जागृयात् ॥ १६ ॥ बाजार की चीजें नकली और मिलावट की न हों तराजू की तोल में घट बढ़ न हो और बटखरे कम ज्यादा नाप के न हों इन बातों की जांच पड़ताल राजा को स्वयं करते रहना चाहिए।