न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)
Nyaya Darshan with Vatsyayana Bhashya
by महर्षि गौतम / महर्षि वात्स्यायन
Source: बौद्ध भारती वाराणसी · बौद्ध भारती वाराणसी · 1950 (origin)
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Read in context१७. सू० ] छलप्रकरणम् ७३ च्छन्दतः। यदि वक्ता प्रधानशब्दं प्रयुङ्क्ते ? यथाभूतस्याभ्यनुज्ञा, प्रतिषेधो वा, न च्छन्दतः। अथ गुणभूतम् ? तदा गुणभूतस्य। यत्र तु वक्ता गुणभूतं शब्दं प्रयुङ्क्ते, प्रधानभूतमभिप्रेत्य परः प्रतिषेधति, स्वमनीषया प्रतिषेधोऽसौ भवति, न परोपालम्भ इति ॥ १४ ॥ वाक्छलमेवोपचारच्छलम्, तदविशेषात् ? ॥ १५ ॥ न वाक्छलादुपचारच्छलं भिद्यते; तस्याप्यर्थान्तरकल्पनाया अविशेषात्। इहापि 'स्थान्यर्थो गुणशब्दः, प्रधानशब्दः स्थानार्थः'—इति कल्पयित्वा प्रति- षिध्यत इति ? ॥ १५ ॥ न; तदर्थान्तरभावात् ॥ १६ ॥ न वाक्छलमेवोपचारच्छलम्; तस्यार्थसद्भावप्रतिषेधस्यार्थान्तरभावात्। कुतः ? अर्थान्तरकल्पनातः। अन्या ह्यर्थान्तरकल्पना, अन्योऽर्थसद्भावप्रतिषेध इति ॥ १६ ॥ अविशेषे वा किञ्चित्साधर्म्यादेकच्छलप्रसङ्गः ॥ १७ ॥ तात्पर्य हो तो मुख्य अर्थ की स्वीकृति या अस्वीकृति देना चाहिये, जब गौण अर्थ अभि- प्रेत हो तो गौण की। परन्तु जब वक्ता गौण अर्थ के अभिप्राय से प्रयोग करे और प्रतिवादी प्रधानभूत अर्थ मानकर उसको वाद में रोके तो यह प्रतिवादी का स्वेच्छया ( मनमाना ) प्रयोग है। इससे वादी का प्रतिषेध करना उचित नहीं है ॥ १४ ॥ वाक्छल से उपचारच्छल में कोई भेद न होने से उसे वाक्छल ही क्यों न मान लिया जाये ? ॥ १५ ॥ वाक्छल से उपचारच्छल में कोई भेद नहीं होता; क्योंकि वाक्छल में भी 'नव' शब्द का 'संख्यार्थक नव' अर्थ कल्पित किया जाता है, इसी प्रकार उपचारच्छल में भी मञ्च- स्थपुरुषबोधक 'मञ्च' शब्द को मञ्च अर्थ से कल्पित करके वादी का प्रतिषेध किया जाता है तो उपचारच्छल को भी वाक्छल ही क्यों न मान लें ? ॥ १५ ॥ अर्थभेद होने से उपचारच्छल को वाक्छल नहीं कहा जा सकता ॥ १६ ॥ वाक्छल ही उपचारच्छल नहीं हो सकता; क्योंकि उस उपचारच्छल में अर्थसद्भाव- प्रतिषेध यह अर्थान्तर (भेद) है। किससे ? अर्थान्तरकल्पना से। अर्थान्तरकल्पना दूसरी बात है; तथा जो अर्थ है उसका निषेध करना दूसरी बात। अतः अर्थान्तरकल्पनारूप वाक्छल में अर्थसद्भावप्रतिषेधरूप उपचारच्छल का समावेश नहीं हो सकता ॥ १६ ॥ कुछ सादृश्य से यदि अविशेष मानेंगे तो एक सामान्यछल ही रह जायेगा ॥१७॥ CC-0. Jangamwadi Math Collection. Digitized by eGangotri