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अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)

DevanagariHindipublished183 पृष्ठ

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समाज का रूप समझायेंगे और समझ कर जब समझायेंगे तो सब पर असर हो जायगा या सिर्फ गीता कण्ठस्थ करके ही छोड़ देने वाले भक्त रहोगे। संसार के बड़े बड़े संत महात्मा भी यही काम करते आ रहे और जब तक सन्तों का संग रहेगा, तब सत्यनारायण का व्रत भी रहेगा और जब तक संतों का संग या सत्यनारायण का नाम रहेगा तो पचास पचास लाख लोग एक साथ सत्यनारायण की कथा सुनेंगे। नहीं तो यह सब समाप्त हो ही रहा सत्यानाशी समाज बन ही तो रहा है। पचास रूप का यह सत्यनारायण समाप्त हुआ। तो नाम का ध्यान है? लेकिन यह नाम कौन तो क्या यह नाम है? फिर यह नाम कौन ऐसा तो नहीं भगवान स्वरूप का ध्यान करते हुए सत्यम् परब्रह्मम् है; स्वरूप ध्यान स्वरूपम् हो या ध्यान शब्दम् हो? स्वरूप का ध्यान करने पर तो स्वरूप परमात्मा और भगवान् स्वरूप प्रत्यक्ष सामने आ जाता होगा, लेकिन यह स्वरूप भी तो मिट जाता है। भगवान् स्वरूप तो साकार है, जो साकार रहेगा वह मिटेगा व जो न मिटे ऐसा स्वरूप? हे व्यास, हे शौनक इन दोनों का स्वरूप क्या रूप तो सत्य और असत्य का भेद जब तक नहीं जाने; इसका भेद जानकर रूप का त्याग न हो तब तक रूप देखना, स्वरूप का ध्यान असम्भव। तब व्यास जी विस्तार देकर सत्यनारायण के दो रूप कहे, जिसका कि पहले किसी रूप का तो स्वरूप ध्यान न होना भगवान् के भक्त को रूप ही तो ध्यान बनाकर ले गया होगा न! दो रूप ऐसा समझाया कि जो सत्य वह सत्य का ध्यान रूप का नहीं रूपवान् जब तक रूप का नाम न समझ परमात्मा स्वरूप देखना कठिन होगा जिसे संत या भगवान् स्वरूप सत्यनारायण भगवान् कहते हैं। भगवान् का रूप नहीं है। जिसने स्वरूप बनाया व तो मिटेगा इसका न मिटे; परमात्मा सत्यनारायण स्वरूप व रूप समझकर देखा, सत्यनारायण व्यास जी स्वरूप रूप को सत्यनारायण स्वरूप दिया या दो रूप एक असत्य परमात्मा का दूसरा सत्य परमात्मा। जिस रूप को--सत्य को सब सन्तुक स्वरूप मानते स्वरूप नाम रूप का सत्य का रूप माना गया रूप का ध्यान स्वरूप ध्यान समाधि स्वरूप का रूप देखना स्वरूप समाधि द्वारा संत रूप बनाया या सत्य का रूप माना, रूप देखना असत्य, स्वरूप का रूप, ध्यान सत्यनारायण के रूप का नाम ध्यान रूप या सत्यता का रूप ध्यान होगा, या दो रूप एक रूप दूसरा रूप? परमात्मा का एक रूप होगा? संत दूसरा रूप, दो रूप ज्ञान का रूप दूसरा रूप का ही स्वरूप रूप हो? रूप देखना या न रूप सत्यनारायण स्वरूप ध्यान रूप या सत्य ध्यान है, या दोनों रूप का ही रूप देखना ही रूप का नाम रूप ही रूप का, स्वरूप का रूप? रूप रूप स्वरूप का स्वरूप रूप है? रूप तो संत रूपी सत्य स्वरूप को रूप या रूप न होने पर ही रूप का रूप सत्यनारायण का नाम रूप माना गया हो! सत्यनारायण का रूप तो यह रूप स्वरूप या रूप होगा? या तो संत स्वरूप का स्वरूप होगा? स्वरूप तो एक है, रूप अनेक। जो स्वरूप देखना हो सत्य का ध्यान सत्यनारायण रूप बन कर, स्वरूप समझना रूप, ध्यान सत्यनारायण रूप जब तक न होगा तब तक, व्यास का सत्य स्वरूप का ध्यान रूप हो? व्यास जी रूप स्वरूप परमात्मा का रूप स्वरूप देखना ऐसा न होगा, जो स्वरूप को रूप जैसा देखना या दो स्वरूप सत्य दूसरा स्वरूप रूप, रूप हो? या रूप रूप परमात्मा का रूप, परमात्मा का रूप देखना व्यास जी सत्य रूप से परे को स्वरूप न मान, जो स्वरूप का रूप जब सब रूप रूप रूप समझ ले तब व्यास जी कहते... हे शौनक रूप देखना; स्वरूप को रूप का ही रूप समझ कर संत रूप देखना कैसा? कैसा रूप? रूप तो संत का स्वरूप होगा, सत्यनारायण रूप, संत रूप को ही सत्यनारायण रूप कहा गया क्योंकि रूप संत का स्वरूप रूप रूप माना ही रूप समाधि रूप का नाम ही तो रूप होगा! जो दो स्वरूप रूप रूप देखने से पहले ही रूप देखना हो संत सुनो!, जो सत्य रूप स्वरूप

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