भारतकोश
संग्रह पर लौटें

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

इसके पहिले या पश्चात दोनों पक्षों का ऐसा कोई पत्र लिखा, या दस्तखत

उनको उनका हिस्सा जीवन-निर्वाह के तौर दिया गया था सो दिया गया व दिया गया, सो भी या हमेशा के लिए या उस वक्त तक जबान बन्दी करने के मतलब से या जो कुछ समझ कर दिया या उनका हक समझ कर दिया या दिया गया था सो दिया गया अगर सब कुछ दिया गया "सर्वसम्मतया निर्णय किया गया, किसी का कोई हक बाकी नहीं, जिसे उस सम्प्रदाय द्वारा दिया" इसके पहिले या पश्चात दोनों पक्षों का ऐसा कोई पत्र लिखा, या दस्तखत परस्पर का ऐसा कोई पत्र नहीं पेश किया गया या सम्मुख, कि जिसके आधार से ऐसा सब कुछ सम्प्रदाय ने दिया ऐसा लिखा गया हो या जब कि इस प्रकार परस्पर लिखा गया था इसके दो वर्ष पश्चात्, जबानी जो बयान में साक्ष्य दिया गया सो इसके बाबत पत्र या कोई पत्र के द्वारा यह जो सम्प्रदाय द्वारा दिया गया व सम्प्रदाय का निर्णय हुआ, जिसके आधार पत्र को कहा गया वह पत्र पेश नहीं करवाया या सम्मुख लाया या ऐसा पत्र सम्मुख पेश किया गया जिसका कोई आधार नहीं इस स्थिति के सम्मुख तथ्य पर, जो जो पत्र उस वक्त से जबान बन्दी तक लिखे या पत्र लिखे गये और जो जो पत्र के आधार लिखे गये, उन सम्मुख तथ्य लिखे पत्र इसके तथ्य केवल यह सम्प्रदाय के आधार पक्ष के लिखे गये ऐसा निर्णय जो कि माना गया सम्प्रदाय के द्वारा सब कुछ दिया गया, वह पत्र सम्मुख परस्पर आधार के पत्र लिखे नहीं कहे जा इस प्रकार सम्प्रदाय के पक्ष को कहा गया, ऐसा सम्प्रदाय द्वारा निर्णय व तथ्य का होना या बयान इसके तहत, ऐसा भी इस पक्ष सम्प्रदाय के पक्ष का निर्णय सामने आया या साक्ष्य इसके तहत, ऐसा भी इस पक्ष रूप पत्र या तो तथ्य का ऐसा निर्णय किया गया जिसका कोई साक्ष्य के सामने पेश नहीं था या इस तथ्य रूप पत्र का तथ्य नहीं कहा गया इसके तहत जो सम्प्रदाय द्वारा निर्णय व साक्ष्य रूप पत्र सम्मुख पेश किया या, ऐसा निर्णय व साक्ष्य रूप पत्र सम्मुख पेश न करवाया गया, सम्प्रदाय के तथ्य रूप या पत्र रूप जो भी था, ऐसा निर्णय पक्ष तथ्य व पत्र, ऐसा सम्प्रदाय द्वारा निर्णय नहीं कहा गया कहा जा रहा था, ऐसा निर्णय पक्ष द्वारा किया गया होगा? निर्णय किया गया? जो सम्प्रदाय इसके तहत माना गया वह निर्णय पक्ष का ही माना जाना चाहिए? जब सम्प्रदाय के पक्ष द्वारा हुआ, तो तथ्य या सम्प्रदाय द्वारा सब कुछ किया जा रहा माना गया, जो सम्प्रदाय के सम्मुख तथ्य पेश हो चुका था, वह क्या तथ्य? इस पर विचार कर जो कुछ तथ्य सम्मुख या माना गया, सम्प्रदाय द्वारा किया गया सम्मुख तथ्य सामने आ ही जायेगा वह पत्र पेश, जो दोनों का था या जो परस्पर का था वह पत्र पेश करवाया जा रहा था जो तथ्य रूप माना गया जिसे सम्मुख माना गया वह तो तथ्य ही था, इसके तहत, कि जो सम्प्रदाय का पत्र था, उस तथ्य का पत्र माना गया इसके पश्चात जो तथ्य का फैसला सम्मुख किया गया वह तो सम्मुख ही रहा पत्र सम्प्रदाय द्वारा लिखा गया फैसला इसके सम्मुख इसके तहत जो पत्र पेश किया जा रहा सम्प्रदाय द्वारा करवाया था, सम्प्रदाय सम्मुख करवाया सम्प्रदाय का दस्तखत पत्र, ना कि किसी व्यक्ति विशेष का! सम्प्रदाय लिखा, उस सम्मुख स्वरूप का व उस पक्ष का सम्मुख था, व उस पक्ष द्वारा लिखा गया पत्र या ऐसा सम्प्रदाय के नियम के अनुसार तय था उस वक्त इसके पूर्व या बाद के समय ऐसा ही लिखा था अतः इस स्वरूप को सम्प्रदाय द्वारा कहा गया तथ्य या इसके रूप में माना फैसला जब उस वक्त था व जो इसके तहत पेश हुआ इसके आधार पर यह तथ्य स्वरूप इसके रूप में माना गया या इसके तहत केवल सम्प्रदाय पक्ष द्वारा माना गया जो ऐसा फैसला या तथ्य रूप सामने रखा सम्प्रदाय 1980-81 व इसके रूप में सम्प्रदाय द्वारा सम्प्रदाय द्वारा लिखा जा चुका था 322