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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 103

१०२ पद्मावत । नौ पौंरी १ ते गढ़ मँझियाराँ । औ तहँ फिरहिं पांचकुतवाराँ ॥ दशौंदौर गुप्त एक नाके । अगमं चढ़ाव वाट सुठिबांके ॥ भेदी जाय कोई वह घाटी । जौलहिभेद चढ़ै होयचांटी ॥ गढ़तरि कुण्ड सुरंग तेहि माहां । ते वे पंथ कहौं तोहि पाहां ॥ चोर पैठि जस सेंध संवारी । जुवा पैंत जस लाय जुवारी ॥ दो० जसमरजिया समुद्रधस, मारेहाथ आवतस सीप । ढूँढ़ि लेहु जो स्वर्ग द्वारे, चढ़ै सो सिंहलदीप ॥ दशौंदुवार ताल का लेखा । उलट दृष्टि१२ जो लावेसोदेखा॥ जायसोजायश्वास मनबन्दी। जसधसिलीन्हकान्है कालिन्दी ॥ तू मनमाथ मारके श्वासा । जो पै मरहि आप कर नासा ॥ प्रकट लोकचार कहुँ बाता । गुप्तं लाव मन जासों रातों ॥ होंहूँ कहत सबैमति खोई । जो तू नाहिं आहि सबकोई ॥ जीतहि जुरी मरै इकबारा । पुनि को मीचै मरै को पारा ॥ आपहिं गुरु सो आपहिं चेला । आपहिं सब औ आप अकेला ॥ दो० आपहिं जीवन मरनपुनि, आपै तनमन सोध । आपहिं आप करै जो चाहै, कहां सो दूसर कोय ॥


पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes): नौ दरवाज़ा तथा नौ सूराख बदन के आंख २ कान २ मुँह एक १ नथुना २ गुदा १ लिंग १-१ दरमियान २ पांच कोतवाल यहां मुराद काम क्रोध अहंकार लोभ वगैरह से है ३ दश इंद्रिय बदनकी कर्मेंद्रिय ५ ज्ञानेंद्रिय ५-४ छिपा हुआ ५ जहां किसी का दखल न हो ६ राह ७ बहुतटेढ़ा ८ चींटी ६ दांव १० दश दरवाज़े बदन आदमी के ११ निगाह १२ योग की क्रिया बाँयें पैरकी रग दहिने पैरसे पकड़ श्वास को तोंदी के नीचे से रोक दो अँगुली से होंठ बीच की अँगुली से दोनों नथुने दोनों शहादत की अँगुली से आंख दो अँगुली से कान के सूराख बन्द कर ईश्वर का नाम तोंदी से खींच कर ब्रह्मांड को श्वास चढ़ाये १३ श्रीकृष्णजी १४ यमुना १५ ज़ाहिर १६ छिपा १७ लाल १८ मैं १६ अक़्ल २० मौत २१ जीना २२ ॥