भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । १०३ खण्ड उन्नीसवां राजा गढ़ छेंका खण्ड ॥ सिधि गुटका राजैं जो पावा । औ भइसिद्धि गणेश मनावा ॥ जब शंकर सिधि दीन्ह कुटका । परी हूल योगिन गढ़ छेका ॥ सबै पद्मिनी देखहिं चढ़ी । सिंहल घेर गईं उठि मढ़ी ॥ जस घर फिरा चोर मतकीन्हा । तेहिविधिसेंधचाहिगढ़दीन्हा ॥ गुप्त चोर जो रहे सो सांचा । परगट होय जीव नहिं बांचा ॥ पँवरपँवरे गढ़ लाग केंवारा । औ राजा सों भई पुकारा ॥ योगी आय छेंक गढ़ मेली । नाजनौं कौन देश कहँ खेली ॥ दो० भयो रजायसु देखो, को भिखार अस ढीठ । वेगैं वरज तेहि आवहिं, जन दुइचार बसीठँ ॥ उत्तर बसीठैं दुइआय जुहारी । की तुम योगी की बनजारी ॥ भयो रजायसुँ आगेंखेलहिं । गढ़ तरछांड़ि अन्तँ होय मेलहिं ॥ असलागहिकेहिकेसिखै दीन्हें।आयहिम रहिहाथंजिवलीन्हें॥ यहां इन्द्रासन राजा तपा । जाहि रिसाय सूरै डरछिपा ॥ हो बनजार तो वनजैं विसाहो । भर व्योपार लेहु जो चाहो ॥ योगी होहुतो युक्ति सों मांगहु । मुक्ते लेहु लैमारेगं लागहु ॥ यहां देवता आश के हारी । तुम पतङ्गै को आहि भिखारी ॥ दो० तुम योगी वैरागी, कहत न मानी कोह । लेहु मांग कछु भिक्षा, खेल अन्तकहँ होहिं ॥ आन जो भीखहों आयों लिये । कसन लेउँ जो राजा दिये ॥ पद्मावत राजा की बारी । हौं योगी वह लाग भिखारी ॥


पाद-टिप्पणी: दरवाज़ा १ हुक्म २-७ जल्द ३. वकील ४-५ सलाम ६ जाना ८ क़िला ६ और जगह १० सिखाना ११ सूर्य १२ माल १३ तदवीर १४ रोज़ी १५ राह १६ पांखी १७ चले जाउ और कहीं १८ भीखके वास्ते १६ लड़की २० ॥